
रांची: झारखंड के सारंडा और झारखंड-बंगाल के सीमावर्ती जंगलों में लंबे समय से सक्रिय रहे तीन इनामी माओवादियों ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, उसकी पत्नी और 10 लाख रुपये की इनामी जोनल कमेटी सदस्य मीता उर्फ नयनतारा तथा एक लाख रुपये की इनामी महिला माओवादी बुलू उर्फ गौरी शामिल हैं। झारखंड पुलिस मुख्यालय ने तीनों के आत्मसमर्पण की पुष्टि की है।
तीनों पर झारखंड और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में कुल 81 मामले दर्ज हैं। इनमें रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन के खिलाफ 44, मीता उर्फ नयनतारा के खिलाफ 19 और बुलू उर्फ गौरी के खिलाफ 18 मामले दर्ज बताए गए हैं।
सुरक्षा बलों का दबाव बढ़ा तो बंगाल में किया सरेंडर
पुलिस के मुताबिक, झारखंड में माओवादी विरोधी अभियान तेज होने और सुरक्षा बलों की लगातार बढ़ती दबिश के बीच तीनों ने झारखंड से सटे पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा में आत्मसमर्पण करने का फैसला किया।
आत्मसमर्पण करने वालों में रामप्रसाद मार्डी को माओवादी संगठन का महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता था। वह संगठन में रीजनल कमेटी सदस्य (RCM) के पद पर सक्रिय था और उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सरेंडर के दौरान उसने AK-47 राइफल भी जमा की।
रामप्रसाद मूल रूप से पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा क्षेत्र का रहने वाला है। बताया जाता है कि वह करीब दो दशक से माओवादी संगठन से जुड़ा था और सारंडा, दलमा, अयोध्या हिल्स तथा जंगलमहल के इलाकों में माओवादी गतिविधियों में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संगठन में उसकी अहम जिम्मेदारी के कारण वह सुरक्षा बलों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ था। रामप्रसाद मार्डी के खिलाफ पटमदा, घाटशिला, एमजीएम, गालूडीह, बोड़ाम, तिरुलडीह, खरसावां और जराईकेला समेत कई थानों में प्राथमिकी दर्ज है।
पत्नी भी थी संगठन की सक्रिय कमांडर
रामप्रसाद की पत्नी मीता उर्फ नयनतारा भी माओवादी संगठन की सक्रिय सदस्य रही है। वह पश्चिम मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम थाना क्षेत्र के सोनाचूड़ा की रहने वाली बताई गई है। संगठन में उसे जोनल कमेटी सदस्य (ZCM) की जिम्मेदारी मिली हुई थी। मीता पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
बताया जाता है कि कई मुठभेड़ों और माओवादी गतिविधियों के दौरान मीता अपने पति रामप्रसाद के साथ रहती थी। अब दोनों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
तीसरी महिला माओवादी पर एक लाख का इनाम
आत्मसमर्पण करने वाली तीसरी माओवादी बुलू उर्फ गौरी है। वह पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबनी थाना क्षेत्र के करमसोल की रहने वाली है और मदन महतो की पत्नी बताई गई है। वह संगठन में सक्रिय कैडर के तौर पर काम कर रही थी। उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
कई मुठभेड़ों और आईईडी विस्फोटों में सामने आया रामप्रसाद का नाम
रामप्रसाद मार्डी के खिलाफ दर्ज मामलों में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़, आईईडी विस्फोट और माओवादी हिंसा से जुड़े कई गंभीर मामले शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा और आसपास के जंगलों में माओवादी गतिविधियों के दौरान वह सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बना रहा।
1 मार्च 2026 को पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर थाना क्षेत्र के चिड़िया ओपी, छोटानागरा और जराईकेला के सीमावर्ती इलाके में मारंगपोंगा और किनबीर के बीच जंगल में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान माओवादियों की गोलीबारी में कोबरा बटालियन का जवान विक्रम यादव घायल हो गया था। माओवादी मौके से भाग निकले थे। घटनास्थल से सुरक्षा बलों ने 131 कारतूस, तीन मैगजीन और एक वायरलेस सेट बरामद किया था।
इसी ऑपरेशन से लौटने के दौरान माओवादियों द्वारा किए गए आईईडी विस्फोट में कोबरा बटालियन के सहायक समादेष्टा अजय मल्लिक और हवलदार संजय कुमार घायल हो गए थे।
19 सितंबर 2024 को जराईकेला थाना क्षेत्र के तिरिलपोसी में आईईडी विस्फोट की घटना में बीडीडीएस टीम का जवान सुगुमार घायल हुआ था।
वहीं, 11 जनवरी 2023 को टोंटो थाना क्षेत्र के तुंबाहाका जंगल में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इसके बाद आईईडी विस्फोट की घटनाओं में कोबरा बटालियन के कई जवान घायल हुए थे। खरसावां थाना क्षेत्र के रायजमा में भी आईईडी विस्फोट की घटना में रामप्रसाद का नाम सामने आया था।
एमजीएम थाना क्षेत्र के सुकराला डालापानी स्थित झाटी पहाड़ी के पास 11 जुलाई 2028 को हुई मुठभेड़ में सीआरपीएफ जवान निर्मल घोष शहीद हुए थे।
सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई और बढ़ते दबाव का असर अब झारखंड-बंगाल सीमा पर माओवादी नेटवर्क पर साफ दिखाई देने लगा है। रामप्रसाद समेत अन्य वांछित माओवादियों के खिलाफ पूर्वी सिंहभूम पुलिस ने हाल के दिनों में सीमावर्ती इलाकों में पोस्टर चस्पा किए थे। वहीं, सारंडा और कोल्हान के जंगलों में केंद्रीय सुरक्षा बलों और पुलिस की ओर से लगातार कॉम्बिंग एवं सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।
इसी बीच सचिन उर्फ रामप्रसाद और उसकी पत्नी मीता के आत्मसमर्पण को माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दोनों के हथियार डालने से बंगाल-झारखंड सीमा पर लंबे समय से सक्रिय माओवादी नेटवर्क कमजोर हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, दोनों राज्यों की सीमा से सटे इलाकों में माओवादियों का प्रभाव अब लगभग समाप्त होने की कगार पर है।
दूसरी ओर, सुरक्षाबलों की चौतरफा घेराबंदी और लगातार बढ़ते दबाव के बीच एक करोड़ रुपये का इनामी माओवादी केंद्रीय कमेटी सदस्य असीम मंडल उर्फ आकाश भी अपना पुराना ठिकाना छोड़कर फरार हो गया है। उसके ठिकाने और संभावित गतिविधियों को लेकर पुलिस एवं खुफिया एजेंसियां सतर्क हैं।
असीम मंडल की तलाश में सीमावर्ती जंगलों में लगातार सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां उसके संभावित ठिकानों और आवाजाही के रास्तों पर भी नजर बनाए हुए हैं।





