धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला अंतर्गत कुरुद क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने अभिभावकों से लेकर प्रशासन तक सभी को चिंता में डाल दिया है। कुरुद ब्लॉक के दहदहा गांव स्थित मिडिल स्कूल में पढ़ने वाले 35 बच्चों की कलाई पर एक जैसे कट के निशान पाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि ये निशान किसी दुर्घटना या खेल के दौरान लगी चोट के नहीं, बल्कि बच्चों द्वारा खुद ब्लेड जैसी धारदार चीज से बनाए गए बताए जा रहे हैं।
यह मामला तब सामने आया जब 13 फरवरी को बच्चों के परिजनों ने अपने बच्चों की कलाई पर कटने के निशान देखे। शुरुआत में घरवालों को लगा कि बच्चों को खेलते समय चोट लगी होगी, लेकिन जब कई बच्चों के हाथों पर बिल्कुल एक जैसे जख्म नजर आए तो संदेह गहरा गया। इसके बाद परिजन सीधे स्कूल पहुंचे और शिक्षकों से इस संबंध में जवाब मांगा। स्कूल प्रबंधन ने मामले की जांच की तो पता चला कि छात्रों ने किसी धारदार चीज से अपनी कलाई को जख्मी किया है। इसके बाद स्कूल प्रबंधन की ओर से घटना की जानकारी जिला प्रशासन को दी गई।
कुरुद क्षेत्र के तहसीलदार सूरज बंछोर ने बताया कि बच्चों से बातचीत करने पर ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने यह कदम किसी दबाव या जबरदस्ती में नहीं उठाया। बच्चों के अनुसार, एक बच्चे को ऐसा करते देख अन्य बच्चों ने भी उसकी नकल की और वही करने लगे। यानी यह व्यवहार एक तरह से ‘देखा-देखी’ में फैलता चला गया।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी
स्कूल प्रबंधन द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में पता चला कि स्कूल में कुल 92 बच्चे पंजीकृत हैं, जिनमें से 35 बच्चों की कलाई पर कट के निशान हैं। इनमें 14 छात्राएं और 21 छात्र शामिल हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बच्चों ने ये कट करीब एक महीने पहले लगाए थे और अब केवल उनके निशान ही बचे हैं।
डॉक्टरों को आशंका है कि बच्चों द्वारा ऐसा कदम किसी गलत आदत या संभावित नशे की ओर इशारा कर सकता है, हालांकि अभी इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।
मामले को गंभीर मानते हुए 16 फरवरी को सभी प्रभावित बच्चों की काउंसलिंग कराई गई। काउंसलिंग का उद्देश्य बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है। प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल प्रबंधन को भी बच्चों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल प्रशासन जांच में जुटा हुआ है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर बच्चों ने इतना खतरनाक कदम क्यों उठाया और इसके पीछे कोई बाहरी प्रभाव तो नहीं था।














