हजारीबाग के तत्कालीन डीसी का आदेश रद्द : अधिकारी के आदेश से 60 साल पुरानी जमाबंदी रद्द नहीं की जा सकती.
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झारखंड हाई कोर्ट ने हजारीबाग के केरेडारी प्रखंड के पांडु गांव से जुड़े भूमि विवाद के दो मामलों में अहम फैसला सुनाया है. जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने कहा कि महज प्रशासनिक आदेश से करीब 60 साल से चली आ रही जमाबंदी को रद्द नहीं किया जा सकता. यदि सरकार को किसी जमाबंदी या भूमि बंदोबस्ती की वैधता पर संदेह है, तो उसे अपने अधिकार और स्वामित्व का निर्धारण करने के लिए सक्षम सिविल न्यायालय में मामला दायर करना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने 23 अप्रैल 2017 को हजारीबाग के तत्कालीन डीसी द्वारा पारित जमाबंदी रद्द करने के आदेश को रद्द कर दिया. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मो. जाहिद मियां और मो. शमीम मियां की ओर से अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह व हर्ष चंद्रा ने पक्ष रखा. उन्होंने अदालत को बताया कि संबंधित जमीन की बंदोबस्ती साधारण डिक्री के माध्यम से तत्कालीन जमींदार द्वारा की गयी थी. वर्ष 1955 से उनके नाम पर जमाबंदी चल रही थी और वे नियमित रूप से सरकारी कर वसूलते रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि 2013 में एनटीपीसी के भूमि अधिग्रहण के दौरान अपर समाहर्ता ने जांच के बाद उन्हें मुआवजे का वैध दावेदार माना था.
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