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ओडिशा में 22 माओवादियों ने किया सरेंडर, भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी सौंपे; 5-27 लाख तक का था इनाम

On: December 23, 2025 4:51 PM
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मलकानगिरी: ओडिशा के नक्सल प्रभावित मलकानगिरी जिले में मंगलवार को माओवाद विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। जिले में सक्रिय 22 माओवादी कैडरों ने एक साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह ओडिशा में वर्ष 2025 का अब तक का सबसे बड़ा और पहला सामूहिक आत्मसमर्पण माना जा रहा है।


पुलिस और जिला प्रशासन के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में संगठन के एक संभागीय समिति सदस्य (DVCM), छह एरिया कमेटी मेंबर (ACM) और 15 पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन सभी पर लंबे समय से सुरक्षा बलों पर हमले, हिंसा और विकास कार्यों में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप थे।

ओडिशा के डीजीपी वाई बी खुरानिया और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में सरेंडर करने वाले माओवादियों ने 9 हथियार, 150 कारतूस, 20 किलोग्राम विस्फोटक, 13 आईईडी, जिलेटिन छड़ें और अन्य सामग्री अधिकारियों को सौंप दी। अधिकारी ने बताया कि सरेंडर करने वाले अधिकतर माओवादी पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से हैं, लेकिन ओडिशा में सक्रिय थे।


लाखों का इनाम था घोषित


अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक माओवादी पर 5.5 लाख रुपये से लेकर 27.5 लाख रुपये तक का इनाम घोषित था। ये सभी लंबे समय से मलकानगिरी और आसपास के इलाकों में सक्रिय थे और पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल थे।


पुनर्वास नीति के तहत मिलेगा सहयोग


जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों का लाभ भी दिया जाएगा।


माओवादी संगठन से मोहभंग बना वजह


प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने संगठन के भीतर बढ़ते मतभेद, आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार और सरकार की विकास योजनाओं से प्रभावित होकर यह कदम उठाया है। पुलिस का कहना है कि लगातार चलाए जा रहे सुरक्षा अभियानों और विकास कार्यों का यह सकारात्मक परिणाम है।


दूसरे राज्यों में भी बढ़ा आत्मसमर्पण का सिलसिला


गौरतलब है कि हाल के महीनों में छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना और ओडिशा जैसे नक्सल प्रभावित राज्यों में बड़ी संख्या में माओवादी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इसे नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की रणनीति की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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