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बंगाल में SIR का खौफ: ऑक्सीजन ट्यूब लगाकर सुनवाई में पहुंचा बुजुर्ग, मौत से मचा हड़कंप

On: January 5, 2026 9:15 AM
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कोलकाता/दक्षिण 24 परगना: पश्चिम बंगाल में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को लेकर विवाद और शिकायतों का सिलसिला लगातार गहराता जा रहा है। अब यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके गंभीर मानवीय परिणाम सामने आने लगे हैं। दक्षिण 24 परगना जिले के जयनगर इलाके से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे राज्य में चिंता बढ़ा दी है।


सुनवाई के नोटिस के बाद बढ़ा डर, अस्पताल से सीधे सुनवाई तक जाना पड़ा


जयनगर नंबर-2 ब्लॉक के गड़देवानी ग्राम पंचायत अंतर्गत उत्तर ठाकुरेरचक इलाके के निवासी 68 वर्षीय नजीतुल मोल्ला की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि SIR सुनवाई का नोटिस मिलने के बाद नजीतुल गहरे मानसिक तनाव में चले गए थे।


बताया गया कि वे पहले से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और अस्पताल में भर्ती थे। इसके बावजूद, प्रशासन की ओर से सुनवाई में पेश होने का नोटिस मिलने पर परिवार को मजबूरी में उन्हें अस्पताल से घर लाना पड़ा। अस्पताल में एक बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद नजीतुल को छुट्टी दी गई, ताकि वे सुनवाई में शामिल हो सकें।


ऑक्सीजन ट्यूब लगाकर पहुंचे सुनवाई में, शरीर ने साथ नहीं दिया


परिजनों के अनुसार, नजीतुल मोल्ला नाक में ऑक्सीजन की नली लगाए सुनवाई में पहुंचे। उनकी हालत बेहद नाजुक थी, लेकिन नाम सूची से बाहर होने की चिंता और परिवार के भविष्य का डर उन्हें सुनवाई में जाने के लिए मजबूर कर रहा था।


सुनवाई में शामिल होने के बाद आने-जाने की थकान और मानसिक दबाव उनके शरीर पर भारी पड़ गया। अगले दिन उनकी तबीयत और बिगड़ गई। चित्तरंजन अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


परिवार का आरोप: SIR प्रक्रिया बनी मौत की वजह


मृतक के भतीजे नजीर हुसैन मोल्ला ने कहा, चाचा लंबे समय से बीमार थे। उसी बीच SIR की सुनवाई का समन आ गया। वे अपनी हालत के बावजूद ऑक्सीजन ट्यूब के साथ सुनवाई में गए। सफर और तनाव उनका शरीर नहीं झेल सका। इसके कुछ ही समय बाद उनकी मौत हो गई।


वहीं, मृतक के बेटे हारून मोल्ला का कहना है कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से उसी इलाके में रह रहा है, फिर भी उनके पिता का नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नहीं था। पिछले कई दिनों से पिता इसी बात को लेकर परेशान रहते थे। बार-बार कहते थे, ‘अगर मेरा नाम नहीं है, तो तुम लोगों का क्या होगा।’ नोटिस मिलने के बाद उनकी चिंता और बढ़ गई। पहले से बीमार होने के बावजूद हमें उन्हें सुनवाई में ले जाना पड़ा। मानसिक तनाव और शारीरिक कमजोरी ने उनकी जान ले ली।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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