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नशा तस्करों के खिलाफ ‌एक्शन की तैयारी में झारखंड पुलिस, जब्त होगी प्रॉपर्टी

On: January 9, 2026 1:02 PM
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रांची: झारखंड में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने अब निर्णायक कार्रवाई की रणनीति तैयार कर ली है। अफीम, ब्राउन शुगर, गांजा समेत अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी में लिप्त अपराधियों और संगठित गिरोह के सरगनाओं पर शिकंजा कसने के निर्देश दिए गए हैं। इस कड़ी में अब नशे के पैसों से बनाई गई चल-अचल संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त किया जाएगा।


यह निर्देश पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में रांची, चतरा, पलामू, सिंहभूम, चाईबासा, हजारीबाग, लातेहार, सरायकेला-खरसावां और खूंटी जिले के एसएसपी व एसपी शामिल हुए।


एनडीपीएस अभियुक्तों पर ‘जीरो टॉलरेंस’


डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि एनडीपीएस एक्ट के मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा न जाए। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े अपराधी समाज और युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा हैं, ऐसे में उनके खिलाफ कठोर और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


अवैध अफीम खेती पर विस्तृत समीक्षा


बैठक के दौरान वर्ष 2025 में अवैध अफीम की खेती के विनष्टिकरण के आंकड़ों की समीक्षा की गई। साथ ही 2024-25 में जिन इलाकों में खेती नष्ट की गई, वहां भूमि से जुड़े जीआर (सरकारी अभिलेख) के सत्यापन की स्थिति, विनष्टिकरण से संबंधित दर्ज कांडों की अद्यतन प्रगति और बड़े तस्करों की पहचान कर की गई कार्रवाई पर विस्तार से चर्चा हुई।


पुराने-नए मामलों का लिंक जोड़ने का निर्देश


सभी एसपी को निर्देश दिया गया कि एनडीपीएस के महत्वपूर्ण मामलों में पुराने और वर्तमान कांडों के बीच लिंक स्थापित करें, ताकि पूरे नेटवर्क तक पहुंचा जा सके। इसका उद्देश्य यह है कि छोटे कारोबारी नहीं, बल्कि गिरोह के सरगनाओं को चिन्हित कर उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा सके।


विभागों के बीच समन्वय पर जोर


अवैध अफीम की खेती पर प्रभावी रोकथाम के लिए राजस्व, कृषि, वन और पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने को कहा गया है। संयुक्त रूप से यह पता लगाया जाएगा कि खेती सरकारी, रैयती या वन भूमि पर हो रही है या नहीं, और उसके अनुसार सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।


ड्रोन और स्थानीय सहयोग से निगरानी


डीजीपी ने विशेष शाखा और एनसीबी से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर स्थानीय स्तर पर मानकी, मुंडा, मुखिया, जनप्रतिनिधियों और महिला समितियों से संपर्क कर सहयोग लेने के निर्देश दिए। साथ ही ड्रोन कैमरों के उपयोग से दुर्गम इलाकों में अफीम की खेती की पहचान और विनष्टिकरण की कार्रवाई को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।


वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद


इस समीक्षा बैठक में आईजी मनोज कौशिक, सीआईडी के आईजी असीम विक्रांत मिंज समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। डीजीपी ने सभी जिलों को स्पष्ट संदेश दिया कि नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान को मिशन मोड में चलाया जाए और इसके आर्थिक स्रोतों पर सीधा प्रहार किया जाए।


झारखंड पुलिस की इस रणनीति से साफ है कि अब नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों के लिए न केवल जेल, बल्कि उनकी अवैध कमाई से खड़ी की गई संपत्तियां भी सुरक्षित नहीं रहेंगी।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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