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‘पहले गोली चलाएंगे, फिर बात करेंगे’, ग्रीनलैंड विवाद बढ़ने पर अमेरिका को डेनमार्क की चेतावनी

On: January 9, 2026 2:11 PM
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कोपनहेगन: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक बयानों के बीच डेनमार्क ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि अगर ग्रीनलैंड पर किसी भी विदेशी ताकत ने हमला किया, तो उसके सैनिक बिना किसी आदेश का इंतजार किए तुरंत जवाबी कार्रवाई करेंगे। मंत्रालय ने इसे ‘पहले गोली, बाद में बात’ की नीति बताया है।


डेनिश रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह आदेश कोई नया नहीं, बल्कि 1952 के शीत युद्ध काल के नियमों के तहत है, जो आज भी पूरी तरह लागू हैं। इस नियम के अनुसार, किसी भी संभावित आक्रमण की स्थिति में सैनिकों को ऊपर से निर्देश मिलने का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि तुरंत हथियारबंद प्रतिरोध करना होगा।


1940 के जर्मन हमले से जुड़ा है नियम का इतिहास


डेनमार्क ने इस नीति के पीछे ऐतिहासिक वजह भी गिनाई है। वर्ष 1940 में जब नाजी जर्मनी ने डेनमार्क पर हमला किया था, उस समय संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई थी। सैनिकों को यह स्पष्ट नहीं था कि उन्हें लड़ना है या नहीं, जिसका फायदा हमलावरों को मिला। इसी अनुभव के बाद यह नियम बनाया गया कि भविष्य में किसी भी विदेशी हमले की स्थिति में बिना देरी के जवाब दिया जाएगा।


डेनमार्क का कहना है कि हालात चाहे जैसे हों, यह नियम आज भी उतना ही प्रासंगिक है।


ग्रीनलैंड में ‘जॉइंट आर्कटिक कमांड’ को निर्णायक अधिकार
डेनमार्क ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड में तैनात उसकी सैन्य इकाई जॉइंट आर्कटिक कमांड यह तय करेगी कि कौन-सी गतिविधि हमला मानी जाएगी और किस स्थिति में सैन्य कार्रवाई जरूरी होगी।


यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की इच्छा जता चुके हैं और जरूरत पड़ने पर सैन्य ताकत के इस्तेमाल का संकेत भी दे चुके हैं।
ट्रंप की दोहराई गई मंशा, ‘ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए जरूरी’
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका की रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। उन्होंने यह तक कहा है कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए सैन्य विकल्प को नकारा नहीं जा सकता।


व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी इस रुख का समर्थन करते हुए कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।


रुबियो की कूटनीतिक पहल, लेकिन डेनमार्क अडिग
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि वह अगले सप्ताह डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को खरीदना चाहता है, न कि उस पर हमला करना।


डेनमार्क सरकार ने बातचीत का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही दो टूक शब्दों में कहा है कि ग्रीनलैंड न तो बिकाऊ है और न ही किसी सौदे का हिस्सा बन सकता है।


NATO टूटने की चेतावनी


डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का सैन्य हमला हुआ, तो यह NATO गठबंधन के अंत की शुरुआत साबित हो सकता है।


उनके इस बयान के बाद यूरोप के कई देशों ने संयुक्त बयान जारी कर डेनमार्क और ग्रीनलैंड की क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की बात कही है। यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप प्रशासन से किसी भी सैन्य कदम से बचने की अपील की है।


जेडी वेंस का पलटवार, डेनमार्क पर लापरवाही का आरोप
इस पूरे विवाद के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज़ से बातचीत में डेनमार्क पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि डेनमार्क आर्कटिक क्षेत्र को वैश्विक सुरक्षा के लिए एक मजबूत आधार के रूप में विकसित करने में विफल रहा है।


वेंस ने कहा, ‘ग्रीनलैंड सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए अहम है। मिसाइल डिफेंस और रणनीतिक संतुलन में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।’


भूराजनीतिक तनाव के केंद्र में ग्रीनलैंड


आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के कारण ग्रीनलैंड आने वाले समय में अमेरिका, यूरोप, रूस और चीन के बीच रणनीतिक टकराव का बड़ा केंद्र बन सकता है। फिलहाल डेनमार्क का सख्त संदेश साफ है, ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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