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‘कैसे बनें शंकराचार्य, 24 घंटे में जवाब दें’, अविमुक्तेश्वरानंद को प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण का नोटिस

On: January 20, 2026 11:09 PM
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प्रयागराज: प्रयागराज माघ मेला 2025-26 में मौनी अमावस्या स्नान के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को कथित तौर पर रोके जाने का मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। स्नान को लेकर हुए टकराव के बाद प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर उनसे यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य किस आधार पर प्रचारित कर रहे हैं।


मेला प्राधिकरण का नोटिस


प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से सोमवार को जारी नोटिस में कहा गया है कि ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि अपील के निस्तारण तक कोई भी धर्माचार्य स्वयं को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता।


नोटिस में यह भी उल्लेख है कि अद्यतन स्थिति में किसी भी धर्माचार्य का ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक नहीं हुआ है, इसके बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला क्षेत्र में अपने शिविर पर लगाए गए बोर्ड में स्वयं को शंकराचार्य प्रदर्शित किया है।


प्रशासन ने इसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना मानते हुए 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पक्ष का जवाब


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले ही स्वामी जी का ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में विधिवत पट्टाभिषेक हो चुका था।


उन्होंने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या के दिन स्वामी जी पालकी में बैठकर शांतिपूर्वक संगम स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने पालकी से उतरने का दबाव बनाया। मना करने पर समर्थकों के साथ मारपीट की गई, जिसमें करीब 15 लोग घायल हुए। सभी घायलों की चिकित्सकीय जांच कराई गई है और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी है।


योगीराज ने कहा कि जब तक मेला प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी मांगकर प्रोटोकॉल के अनुसार स्नान की व्यवस्था नहीं करता, तब तक स्वामी जी अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे।


प्रशासन का पक्ष


वहीं, मेलाधिकारी ऋषिराज ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्वामी और उनके समर्थक बैरिकेट तोड़कर संगम नोज तक पहुंच गए थे, जिससे भगदड़ की स्थिति बन सकती थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य स्नान पर्व पर किसी भी प्रकार के वाहन या पालकी की अनुमति नहीं थी और यह नियम सभी पर समान रूप से लागू था।


मेलाधिकारी के अनुसार, किसी को भी स्नान से नहीं रोका गया और आसपास मौजूद अन्य साधु-संतों ने भी स्नान किया। श्रद्धालुओं और कल्पवासियों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।


प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर आरोप


इस पूरे मामले को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मेला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि घटना के बाद आधी रात के बाद एक अधिकारी उनके पास आया और नोटिस स्वीकार कराने का दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा, शंकराचार्य कौन होगा, ये सिर्फ शंकराचार्य ही तय कर सकते हैं, इसे तय करने का अधिकार राष्ट्रपति को भी नहीं है।


नोटिस देने वाला व्यक्ति कानूनगो था, जिसने नोटिस चस्पा कर दिया और अधिकारी लौट गए। स्वामी जी ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन-सी आपात स्थिति थी, जिसके चलते आधी रात में नोटिस जारी किया गया।


उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का गलत हवाला देकर प्रशासन खुद बचने की कोशिश कर रहा है। स्वामी जी ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा महाकुंभ के दौरान प्रकाशित स्मारिका में उन्हें शंकराचार्य के रूप में उल्लेखित किया गया था।


कानूनी पहलू


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने कहा कि मेला प्रशासन द्वारा भेजा गया नोटिस स्वयं सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में आता है।
उन्होंने बताया कि प्रशासन ने 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला दिया है, जबकि उससे पहले 21 सितंबर 2022 के आदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य बताया गया था। स्वामी जी का पट्टाभिषेक 12 सितंबर 2022 को ही हो चुका था।


पीएन मिश्रा ने यह भी बताया कि 2023 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से वासुदेवानंद के खिलाफ याचिका दायर की गई है, जिसमें गलत सूचना और दस्तावेज के आधार पर आदेश लेने का आरोप लगाया गया है। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।


धरना और अन्न-जल त्याग


गौरतलब है कि मौनी अमावस्या के दिन हुई इस घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अन्न-जल त्याग कर धरने पर बैठ गए थे। टकराव के दौरान उनका छत्र भी टूट गया था और शिष्यों के साथ मारपीट के आरोप लगाए गए थे।


विवाद जारी


माघ मेले में हुए इस घटनाक्रम के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर प्रशासन नियमों और सुरक्षा का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थक इसे धार्मिक गरिमा और न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन बता रहे हैं।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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