नई दिल्ली: असंगठित क्षेत्र के कामगारों, कम आय वर्ग और गरीबों को बड़ी राहत देते हुए मोदी सरकार ने अटल पेंशन योजना (APY) को लेकर अहम फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी गई।
सरकार के इस फैसले को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। खासकर ऐसे श्रमिक, जिनके पास रिटायरमेंट के बाद किसी तरह की नियमित आमदनी का साधन नहीं होता, उन्हें इस निर्णय से सीधा लाभ मिलेगा।
सरकारी सहयोग और फंडिंग को भी मिली मंजूरी
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, अटल पेंशन योजना के तहत सरकारी सहयोग जारी रहेगा। इसमें योजना के प्रचार-प्रसार, क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) और विकास से जुड़ी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता शामिल है।
इसके साथ ही, योजना को दीर्घकाल तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए गैप फंडिंग को भी मंजूरी दी गई है, ताकि भविष्य में पेंशन भुगतान में किसी तरह की रुकावट न आए।
60 साल के बाद मिलती है गारंटीड पेंशन
अटल पेंशन योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की गारंटीड मासिक पेंशन मिलती है। पेंशन की राशि लाभार्थी द्वारा कार्यकाल के दौरान किए गए योगदान पर निर्भर करती है।
यह योजना विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों, छोटे व्यापारियों, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिन्हें किसी भी तरह की औपचारिक पेंशन सुविधा उपलब्ध नहीं होती।
वित्तीय समावेशन को मिल रहा बढ़ावा
सरकार का कहना है कि अटल पेंशन योजना न केवल बुढ़ापे में लोगों को नियमित आय का सहारा देती है, बल्कि अधिक से अधिक नागरिकों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में भी मदद करती है। इसी उद्देश्य से योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कैबिनेट का मानना है कि योजना की पहुंच को और व्यापक बनाने के लिए सरकार का निरंतर समर्थन बेहद जरूरी है।
8.66 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 19 जनवरी 2026 तक अटल पेंशन योजना से 8.66 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। सरकार का विश्वास है कि योजना की बढ़ती लोकप्रियता और स्थिरता को देखते हुए लंबे समय तक इसे समर्थन देना जरूरी है, ताकि देश के कमजोर और असंगठित वर्ग को सुरक्षित भविष्य मिल सके।














