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‘महाकाल के दरबार में कोई VIP नहीं’, महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी एंट्री वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

On: January 28, 2026 8:47 AM
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उज्जैन: मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में VIP प्रवेश और दर्शन व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने धार्मिक स्थलों के प्रबंधन में न्यायपालिका की भूमिका और उसकी सीमाओं को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है।


इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा कि महाकाल के समक्ष कोई भी VIP नहीं होता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मंशा और याचिका की प्रकृति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की अर्जियां दायर करने वाले लोग अक्सर श्रद्धालु नहीं होते।


याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने इस विषय में आरटीआई आवेदन भी दायर किया था, जिसके जवाब में मंदिर में VIP प्रवेश की व्यवस्था होने की बात सामने आई है। इस पर सीजेआई ने दो टूक कहा कि अदालतों से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वे तय करें कि किस व्यक्ति को मंदिर के अंदर जाने की अनुमति दी जाए और किसे नहीं।


सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिरों के संचालन और दर्शन व्यवस्था का दायित्व संबंधित प्राधिकरणों और जिम्मेदार अधिकारियों का है। न्यायपालिका का काम यह तय करना नहीं है कि गर्भगृह में कौन प्रवेश करेगा और कौन नहीं।


कोर्ट ने कहा, यह औचित्य और प्रशासन का विषय है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी मौजूद हैं, अदालत को इसमें हस्तक्षेप के लिए नहीं कहा जा सकता।


समान नीति की मांग पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी


याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि गर्भगृह में प्रवेश जिला आयुक्त की सिफारिश पर दिया जाता है और इस मामले में सभी के लिए एक समान नीति होनी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, क्या सभी मौलिक अधिकार गर्भगृह के अंदर ही होंगे? कल आप कहेंगे कि मैं वहां नमाज पढ़ना चाहता हूं।


कोर्ट की इस टिप्पणी से साफ हो गया कि धार्मिक स्थलों की परंपराओं, व्यवस्थाओं और आस्थाओं को संवैधानिक अधिकारों की आड़ में चुनौती नहीं दी जा सकती।


मंदिर प्रबंधन से संपर्क करने की सलाह


अंत में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि यदि उन्हें मंदिर की दर्शन व्यवस्था को लेकर कोई आपत्ति या समस्या है, तो वे सीधे महाकाल मंदिर के प्रबंधन और जिम्मेदार प्राधिकारियों से संपर्क करें और अपनी बात उनके समक्ष रखें।


इस फैसले को धार्मिक स्थलों के स्वायत्त प्रबंधन और न्यायपालिका की सीमाओं को स्पष्ट करने वाला एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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