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जमशेदपुर:12 फरवरी को नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल, जानें मुख्य मांगे

On: February 11, 2026 5:26 PM
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जमशेदपुर:12 फरवरी को नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल, जानें मुख्य मांगे

जमशेद:ट्रेड यूनियनों के संयुक्त राष्ट्रीय मंच द्वारा 12 फरवरी को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया गया है, जिसकी मुख्य मांग चार नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को वापस लेना है। कोल्हान के ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा जमशेदपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में, यह बताया गया कि,
– इन संहिताओं को कोविड महामारी के दौरान बिना किसी विपक्ष या हितधारकों के परामर्श के पारित किया गया था, जिसमें श्रमिकों के अधिकारों के ऊपर कॉर्पोरेट ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को प्राथमिकता दी गई। पांच साल पहले पारित होने के बावजूद, श्रमिकों के कड़े विरोध के कारण इनके कार्यान्वयन को सफलतापूर्वक रोका गया था।
– हड़ताल की तैयारी में औद्योगिक क्षेत्रों के साथ ही, ग्रामीण और शहरी आम जनता के बीच बड़े पैमाने पर जनसंपर्क अभियान चलाया गया हैं। इस हड़ताल का असर औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रों के साथ-साथ सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रों पर पड़ेगा।
– नए चार श्रम संहिताओं और हाल ही में बिना किसी चर्चा के पेश की गई ‘श्रम शक्ति नीति-2025’ को लेकर व्यापक विरोध दर्ज किया गया है, ये श्रमिकों के हितों और उनके मौलिक अधिकारों के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। इन संहिताओं के लागू होने से लगभग 70 प्रतिशत कारखाने श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे नियोक्ताओं की जवाबदेही खत्म होगी और श्रमिकों की कार्यस्थल सुरक्षा व सामाजिक सुरक्षा का कवच पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा। न्यूनतम वेतन, काम के घंटे, ओवरटाइम, नौकरियों के नियमितीकरण, साप्ताहिक अवकाश और सेवानिवृत्ति लाभों की अवधारणा समाप्त हो जाएगी। ट्रेड यूनियन अधिनियम को निरस्त कर यूनियन बनाने की प्रक्रिया को असंभव बनाने और सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति को छीनने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि यूनियन गतिविधियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाइयों के प्रावधान किए गए हैं।
– ‘श्रम शक्ति नीति-2025’ के तहत सरकार ने अपनी भूमिका एक ‘नियामक’ के बजाय केवल ‘सुविधा प्रदाता’ की कर दी है और काम को ‘अधिकार’ के बजाय ‘धर्म’ की संज्ञा देकर श्रमिकों के कानूनी संघर्ष की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है।
– केंद्रीय बजट 2026-27 के संदर्भ में, भी विरोध दर्ज किया गया है । सरकार की भारत को कल्याणकारी राज्य के रूप में बनाए रखने की मंशा नहीं है, जिसका संकेत मनरेगा को नए अधिनियम से बदलने और सामाजिक क्षेत्रों में कम बजट आवंटन से मिलता है। इसके अतिरिक्त, युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर ध्यान न देने और महिलाओं को श्रम शक्ति का हिस्सा बनाने के बजाय केवल वोट बैंक के रूप में देखने पर भी चिंता व्यक्त की गई है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण और बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने को लेकर भी आलोचना की गई है, इससे बड़े कॉर्पोरेट घरानों और विदेशी कंपनियों को लाभ हो रहा है, जबकि स्वदेशी औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था खतरे में पड़ रही है।
– अमेरिका के साथ हुए हालिया व्यापार समझौते पर भी आपत्ति जताई गई है, जिसमें भारतीय सामानों पर 18 प्रतिशत टैरिफ और अमेरिकी सामानों पर शून्य टैरिफ का प्रावधान है, जिसे भारतीय किसानों और लघु उद्योगों के लिए एक बड़ा झटका बताया गया है।
– इन चिंताओं को सामने रखते हुए, यह बताया गया कि- सरकार जनहित के बजाय कॉर्पोरेट मित्रों और विदेशी कंपनियों को फायदा पहुँचा रही है, जिससे छोटे व्यवसायों और उद्यमों को नुकसान हो रहा है और आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल का मुख्य मांगें – चार श्रम संहिताओं को रद्द करने और समान काम के लिए समान वेतन, न्यूनतम मजदूरी एवं सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार सुनिश्चित करना है। ठेकाकरण और आउटसोर्सिंग को समाप्त कर स्थायी रोजगार साथ ही कृषि क्षेत्र के लिए वैधानिक एमएसपी की गारंटी, पूर्ण ऋण माफी और वन एवं भूमि अधिकारों की सुरक्षा की मांग की जा रही है।
मांगों के इस चार्टर में सार्वजनिक उपक्रमों (जैसे HEC) के निजीकरण पर रोक, बिजली संशोधन विधेयक, श्रम शक्ति नीति 2025, और परमाणु ऊर्जा विकास (SHANTI) अधिनियम जैसे जनविरोधी कानूनों को वापस लेने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, सरकारी रिक्त पदों को भरने, आंगनवाड़ी व मिड-डे मील कर्मियों को नियमित करने, मनरेगा को बहाल करने और शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा को सभी के लिए अनिवार्य बनाने की मांग की गई है ताकि देश के संसाधनों और जनता के हितों की रक्षा की जा सके।
– विभिन्न जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन को धार देते हुए आगामी हड़ताल के समर्थन में व्यापक कार्यक्रमों की घोषणा की गई है। इस अभियान के तहत 11 फरवरी को शाम 5:30 बजे आमबगान मैदान से बिरसा (साकची) चौक तक एक विशाल मशाल जुलूस निकाला जाएगा, जो एकजुटता का प्रतीक होगा। हड़ताल के दिन, 12 फरवरी को सभी कामगार अपने-अपने कार्यस्थलों पर धरना देंगे, जिसके पश्चात दोपहर 12 बजे से जुबली पार्क साकची गेट के समक्ष विभिन्न ट्रेड यूनियनों और समर्थक जन संगठनों की सहभागिता के साथ एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
– ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने केंद्र सरकार की ‘राष्ट्र-विरोधी’ और ‘जन-विरोधी’ नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए 12 फरवरी को होने वाली देशव्यापी हड़ताल के दौरान आयोजित सार्वजनिक प्रदर्शनों में समाज के सभी लोकतांत्रिक वर्गों से सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की है।
– आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एटक से अंबुज ठाकुर, सीटू से बिश्वजीत देब, बीमा क्षेत्र से सुभाष करण, बैंक क्षेत्र से हीरा अरकाने, राज्य सरकार के कर्मचारियों की ओर से वीरेंद्र कुमार, सेल्स प्रमोशन इंडस्ट्री से पीयूष गुप्ता और झारखंड वर्कर्स यूनियन की ओर से ओम प्रकाश सिंह ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।
– इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय कुमार डी. शुक्ला, अमित मैती, वाई.डी. मौली आदि ट्रेड यूनियन नेता भी उपस्थित थे।
ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच की ओर से बिश्वजीत देब द्वारा जारी।द्वारा जारी

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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