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लोन वसूली के नाम पर नहीं चलेगी दादागिरी, रिकवरी एजेंटों की बदतमीजी पर बैंक होंगे जिम्मेदार; RBI ने लागू किए सख्त नियम

On: February 13, 2026 1:04 PM
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नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को शेड्यूल्ड कमर्शल बैंकों (रीजनल रूरल बैंकों को छोड़कर) और हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों (HFCs) के लिए कर्ज वसूली प्रक्रिया को लेकर संशोधित ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की हैं। इन प्रस्तावित नियमों का मकसद रिकवरी प्रक्रिया को अधिक मानवीय, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, ताकि उधारकर्ताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जा सके और दबाव, धमकी या मानसिक उत्पीड़न जैसी शिकायतों पर रोक लगाई जा सके।

सभ्य व्यवहार अनिवार्य, बदतमीजी पर कार्रवाई

ड्राफ्ट के मुताबिक बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके रिकवरी एजेंट ग्राहकों से हमेशा शालीन और विनम्र भाषा में बात करें। किसी भी तरह की धमकी, गाली-गलौज, अपमानजनक शब्दों या डराने-धमकाने के तरीकों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

संपर्क का समय तय

ग्राहकों से कर्ज वसूली के लिए संपर्क केवल निर्धारित समय में ही किया जा सकेगा। शाम 7 बजे के बाद फोन कॉल या घर जाकर वसूली करने पर रोक रहेगी। देर रात या अनुचित समय पर परेशान करने की शिकायतों को गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

हर कॉल की रिकॉर्डिंग होगी

रिकवरी एजेंट द्वारा की गई प्रत्येक कॉल को रिकॉर्ड करना अनिवार्य होगा, ताकि विवाद की स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध रहे। इससे ग्राहकों और बैंकों दोनों के लिए पारदर्शिता बढ़ेगी।

ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन जरूरी

कोई भी एजेंट बिना प्रोफेशनल ट्रेनिंग और प्रमाणन के वसूली प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेगा। बैंक को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि एजेंटों का व्यवहार पेशेवर मानकों के अनुरूप हो।

संवेदनशील परिस्थितियों में संपर्क नहीं

घर में किसी की मृत्यु, शादी, त्योहार या गंभीर बीमारी जैसी परिस्थितियों में उधारकर्ता से संपर्क नहीं किया जाएगा। RBI ने इसे उधारकर्ताओं के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक अधिकारों से जोड़ा है।

एजेंट की गलती पर बैंक जिम्मेदार

नए प्रस्ताव में साफ कहा गया है कि रिकवरी एजेंटों के व्यवहार के लिए बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। यदि कोई एजेंट गलत तरीके अपनाता है तो उसकी जवाबदेही संबंधित बैंक की होगी।

डेटा सुरक्षा और बैकग्राउंड चेक

ग्राहकों के निजी डेटा के दुरुपयोग पर सख्त रोक रहेगी। एजेंटों की नियुक्ति से पहले और बाद में नियमित पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य होगी।

6 मार्च तक मांगा गया फीडबैक

यह ड्राफ्ट नियम जनता और बैंकिंग सेक्टर से सुझाव लेने के लिए जारी किए गए हैं। 6 मार्च 2026 तक फीडबैक भेजा जा सकता है। इसके बाद अंतिम गाइडलाइंस जारी होंगी और 1 जुलाई 2026 से इनके लागू होने की संभावना है।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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