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33 बच्चों से दरिंदगी करने वाले ‘हैवान’ पति-पत्नी को फांसी, जज बोले- मरते दम तक फंदे पर लटकाओ

On: February 20, 2026 8:24 PM
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चित्रकूट: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की अदालत ने शुक्रवार को एक ऐसे जघन्य अपराध पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। बच्चों के यौन शोषण और उनकी अश्लील सामग्री बनाकर डार्क वेब के ज़रिए विदेशों में बेचने के दोषी पति-पत्नी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है।

विशेष न्यायाधीश ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में रखते हुए कहा कि आरोपियों के कृत्य इतने अमानवीय और क्रूर हैं कि उनके सुधार की कोई संभावना नहीं बचती। पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा- दोनों पति-पत्नी को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखा जाए।

33 मासूमों का बचपन छीना

अदालत ने रामभवन (55) और उसकी पत्नी दुर्गावती (50) को वर्ष 2010 से 2020 के बीच 33 नाबालिग बच्चों के यौन शोषण, कुकर्म और उनकी अश्लील वीडियो-फोटो तैयार करने का दोषी पाया। पीड़ित बच्चों की उम्र 5 से 16 वर्ष के बीच थी, जबकि कुछ बच्चे मात्र 3 वर्ष के थे।

जांच में सामने आया कि आरोपी बांदा और चित्रकूट क्षेत्र में सक्रिय थे। दोनों मिलकर बच्चों को ऑनलाइन गेम, पैसे और खिलौनों का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे और फिर उनके साथ अमानवीय कृत्य करते थे। इन अपराधों के चलते कई बच्चों को गंभीर शारीरिक चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कई पीड़ित आज भी गहरे मानसिक आघात से जूझ रहे हैं।

यह मामला वर्ष 2020 में तब सामने आया जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात रामभवन के खिलाफ केस दर्ज किया। 17 नवंबर 2020 को CBI ने रामभवन और उसकी पत्नी को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान 4 से 42 वर्ष तक की उम्र के लोगों के बयान दर्ज किए गए, सभी पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण कराया गया और डिजिटल साक्ष्यों को फॉरेंसिक तरीके से जोड़ा गया। सीबीआई ने गिरफ्तारी के 88वें दिन बाद बांदा कोर्ट में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी और 74 गवाहों की मदद से कोर्ट में अपना केस मजबूती से रखा।

CBI की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लैपटॉप के कैमरे से आपराधिक सामग्री रिकॉर्ड करते थे और उसे डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को बेचते थे।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

अदालत ने फैसले में कहा कि जिस तरह से आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से मासूम बच्चों के जीवन को तबाह किया, वह समाज के लिए बेहद खतरनाक है। ऐसे अपराधों पर कठोरतम सजा देना आवश्यक है, ताकि समाज में कड़ा संदेश जाए और भविष्य में कोई ऐसा अपराध करने की हिम्मत न कर सके।

पीड़ितों को मुआवजा

कोर्ट ने सजा के साथ-साथ पीड़ितों के पुनर्वास पर भी जोर दिया। आदेश दिया गया कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। साथ ही आरोपियों के घर से बरामद नकद राशि को भी सभी पीड़ितों में समान रूप से बांटने के निर्देश दिए गए हैं।

Vishwajeet

मेरा नाम विश्वजीत कुमार है। मैं वर्तमान में झारखंड वार्ता (समाचार संस्था) में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं। समाचार लेखन, फीचर स्टोरी और डिजिटल कंटेंट तैयार करने में मेरी विशेष रुचि है। सटीक, सरल और प्रभावी भाषा में जानकारी प्रस्तुत करना मेरी ताकत है। समाज, राजनीति, खेल और समसामयिक मुद्दों पर लेखन मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। मैं हमेशा तथ्यों पर आधारित और पाठकों के लिए उपयोगी सामग्री प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूं। नए विषयों को सीखना और उन्हें रचनात्मक अंदाज में पेश करना मेरी कार्यशैली है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता हूं।

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