गिरिडीह: नगर निगम चुनाव के प्रचार-प्रसार की अंतिम तारीख के बाद शहर के बस स्टैंड रोड स्थित एक होटल में झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में कथित रूप से एक विशेष समाज के लोगों के साथ संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से बैठक जारी थी। इसी बीच प्रशासन को सूचना मिली और मौके पर सदर एसडीएम श्रीकांत यशवंत विस्पुते ने भारी संख्या में पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और बैठक को तत्काल बंद करा दिया. प्रशासन की टीम ने न केवल बैठक रुकवाई, बल्कि एहतियाती तौर पर होटल का शटर भी बंद करवा दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
प्रशासन की इस अप्रत्याशित और कार्रवाई के बाद जिले में सियासत गरमा गई है. इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने प्रशासन के दावे को सिरे से खारिज कर दिया. मरांडी ने कहा कि वे किसी राजनीतिक पार्टी की बैठक में शामिल नहीं थे, बल्कि वे तो सिर्फ होटल में खाना खाने के लिए पहुंचे थे.
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके साथ कुछ कार्यकर्ता भी मौजूद थे, लेकिन यह कोई संगठनात्मक या चुनावी बैठक नहीं थी. मरांडी ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अब होटल में खाना खाने पर भी रोक है? उन्होंने इस कार्रवाई को अनावश्यक और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया, जिससे स्थानीय स्तर पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है.
प्रशासन की इस सख्ती और नेता प्रतिपक्ष के बयान के बाद पूरे जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है. यह घटना गिरिडीह की राजनीतिक फिजा में एक नया मोड़ लेकर आई है, जिससे आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति में और गर्माहट आने की संभावना है. प्रशासन की कार्रवाई और नेता प्रतिपक्ष के स्पष्टीकरण के बीच इस मामले को लेकर फिर से एक बार झारखंड की सियासत में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज होने की पुरजोर संभावना है।











