तेहरान: मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष ने अब खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ती सैन्य टकराहट ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इस युद्ध के केवल चार दिनों में ही ईरान में 787 लोगों की जान जा चुकी है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों की कथित मौत की खबर ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है। आधिकारिक पुष्टि को लेकर भले ही अलग-अलग दावे सामने आ रहे हों, लेकिन तेहरान में शोक और गुस्से का माहौल है। इस घटना को ईरान ने सीधा हमला करार देते हुए जवाबी कार्रवाई की घोषणा की।
इजरायल-अमेरिका के हमलों में ईरान के मिनाब के एक प्राइमरी स्कूल की 165 छात्राएं मारी गईं। मंगलवार को उनके भव्य अंतिम संस्कार समारोह आयोजन किया गया था। स्कूली छात्राओं के अंतिम संस्कार जुलूस में लोगों की भारी भीड़ शामिल हुई। इन मासूमों को दफनाने के लिए जेसीबी से कब्रे खोदी गईं। इस तस्वीर को देखकर किसी का भी कलेजा फट जाएगा।

खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। बहरीन, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद कम से कम छह अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए गए। मंगलवार सुबह रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास को भी निशाना बनाया गया। हालांकि वहां किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन एहतियातन अमेरिका ने अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह जारी की है।
संघर्ष का असर अब आम नागरिकों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दुबई और अबू धाबी जैसे प्रमुख शहरों में मिसाइलों के मलबे गिरने से लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं। कई इमारतों और व्यावसायिक परिसरों को भारी नुकसान पहुंचा है।
सुरक्षा कारणों से यूएई समेत कई पड़ोसी देशों ने अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसका सीधा असर वैश्विक विमानन सेवाओं पर पड़ा है। सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गई हैं और लाखों यात्री विभिन्न अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं।
तनाव के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की घोषणा कर दी है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि इस मार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है। जलडमरूमध्य वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल की आशंका जताई जा रही है, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल और अन्य ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबी चली तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
युद्ध के चौथे दिन भी दोनों पक्षों के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियां युद्धविराम की अपील कर रही हैं, लेकिन फिलहाल किसी ठोस कूटनीतिक पहल के सफल होने के संकेत नहीं मिल रहे।
पूरे खाड़ी क्षेत्र में रह रहे लोग भय और अनिश्चितता के साये में जी रहे हैं। लगातार सायरन, विस्फोटों की आवाज और बंद होते हवाई मार्गों ने सामान्य जीवन को ठप कर दिया है।













