हैदराबाद: तेलंगाना में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को उस समय बड़ी सफलता मिली जब करीब 130 नक्सल कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। इन सभी पर कुल 4 करोड़ 18 लाख 20 हजार रुपए का इनाम घोषित था। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की पहल और अपील के बाद इन कैडरों ने सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने सुरक्षा बलों के सामने बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी जमा कराए।
अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने कुल 124 हथियार, 222 मैगजीन और 5205 जिंदा कारतूस सुरक्षा बलों को सौंपे। इन हथियारों में 31 एके-47 राइफल, 21 INSAS राइफल, 38 SLR और .303 राइफल और 1 INSAS लाइट मशीन गन (LMG) शामिल हैं। हाल के वर्षों में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के हथियारों की गुणवत्ता और संख्या के लिहाज से इसे सबसे बड़ी बरामदगी माना जा रहा है।
यह सामूहिक आत्मसमर्पण हैदराबाद स्थित तेलंगाना स्टेट पुलिस के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में हुआ, जहां मुख्यमंत्री की मौजूदगी में माओवादी कैडरों ने औपचारिक रूप से हथियार डाल दिए। बताया गया कि सभी माओवादी चार बसों में यहां पहुंचे थे।
जानकारी के मुताबिक सरेंडर करने वालों में संगठन के कई बड़े पदाधिकारी भी शामिल हैं। इनमें 3 स्टेट कमेटी मेंबर, 1 रीजनल कमेटी मेंबर, 10 डिविजनल कमेटी मेंबर, 46 एरिया कमेटी मेंबर और 70 पार्टी मेंबर शामिल बताए जा रहे हैं। एओबी (आंध्र-ओडिशा बॉर्डर) क्षेत्र के प्रमुख नेता चलसानी नवाथा ने भी अपने साथियों के साथ हथियार डाल दिए। साथ ही PLGA तेलंगाना स्टेट कमिटी के सचिव बडे चोक्का राव उर्फ दामोदर उर्फ जगन और स्टेट कमिटी सदस्य नुने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ गंगन्ना उर्फ सन्नु दादा ने भी सामूहिक आत्मसमर्पण में अपने हथियार डाले।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनकी लड़ाकू क्षमता पर असर पड़ेगा और क्षेत्र में चल रही नक्सली गतिविधियां कमजोर पड़ सकती हैं। सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के पुनर्वास के लिए आर्थिक सहायता, रोजगार और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही है।
बताया जा रहा है कि यह बड़ा कदम 4 मार्च को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की बैठक के बाद सामने आया। माना जा रहा है कि इस बैठक में नक्सलवाद के मुद्दे पर रणनीति और आत्मसमर्पण नीति को लेकर चर्चा हुई थी।
दरअसल मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 21 अक्टूबर 2025 को भी माओवादियों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि जो लोग हथियार छोड़कर समाज के विकास में भागीदारी करना चाहते हैं, सरकार उन्हें हर संभव मदद देगी।
इस बीच मुख्यमंत्री ने शीर्ष माओवादी नेता मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति से भी आत्मसमर्पण करने की अपील की है। गणपति कभी Communist Party of India (Maoist) के महासचिव रह चुके हैं और संगठन की केंद्रीय समिति के वरिष्ठ सदस्य माने जाते हैं। फिलहाल वे भूमिगत बताए जा रहे हैं।
बताया गया कि शनिवार को सरेंडर करने वाले ज्यादातर माओवादी पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की पहली बटालियन से जुड़े हुए थे। इस बटालियन का नेतृत्व पहले थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवूजी करते थे, जिन्होंने हाल ही में तेलंगाना के डीजीपी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।














