रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए पुलिस कांस्टेबल गोपाल राम को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने उनकी बर्खास्तगी को अवैध ठहराते हुए सेवा में पुनः बहाल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त करना अत्यंत कठोर दंड है, जिसे केवल ठोस और प्रमाणिक साक्ष्यों के आधार पर ही दिया जा सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोपाल राम की नियुक्ति 15 जून 1988 को गोविंदपुर थाना में आर्म्ड गार्ड के रूप में हुई थी। उन पर आरोप लगाया गया था कि 1 मार्च 1997 को उन्होंने शराब के नशे में अपने वरिष्ठ अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार किया और हंगामा किया। इस आरोप के आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई और अंततः 1 मार्च 2000 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
इसके बाद गोपाल राम ने विभागीय आदेश के खिलाफ अपील दायर की, जिसे वर्ष 2001 में खारिज कर दिया गया। इसके पश्चात 2002 में दायर उनकी पुनरीक्षण याचिका भी निरस्त कर दी गई।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपों को सिद्ध करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। विशेष रूप से, यह तथ्य सामने आया कि कथित शराब सेवन की पुष्टि के लिए कोई मेडिकल जांच नहीं कराई गई थी और न ही पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अवसर नहीं मिला। गवाहों से जिरह करने का अधिकार भी नहीं दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। अदालत ने इन बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए माना कि पूरी विभागीय प्रक्रिया में खामियां रही हैं।
अपने निर्णय में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित मामले ‘Munna Lal vs Union of India’ का उल्लेख करते हुए कहा कि बिना ठोस साक्ष्यों के किसी कर्मचारी को इतनी कठोर सजा देना न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।
हाईकोर्ट ने गोपाल राम की बर्खास्तगी से संबंधित सभी आदेश जिसमें मूल बर्खास्तगी, अपील और पुनरीक्षण के निर्णय शामिल हैं, को रद्द कर दिया है। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि उन्हें पुनः सेवा में बहाल किया जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बैक वेज (वेतन) के संबंध में निर्णय बाद में लिया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा, यदि आवश्यक हुआ तो राज्य सरकार सजा पर पुनर्विचार कर नया आदेश जारी कर सकती हैं, लेकिन वह कानून सम्मत होना चाहिए।













