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रेल सुरक्षा बल ने अंतर्राज्यीय गांजा तस्कर गिरोह का किया भंडाफोड़,30 लाख के गांजा के साथ तीन को दबोचा

On: June 1, 2026 5:47 PM
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संबलपुर जम्मू तवी एक्सप्रेस में छापामारी

रांची: रेल सुरक्षा बल को फिर से एक बार ऑपरेशन नारकोस के तहत बड़ी सफलता मिलने की खबर आ रही है। अंतर्राज्यीय गांजा तस्कर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है।संबलपुर-जम्मू तवी एक्सप्रेस में सफर कर रहे भी 3 कोच में सफर कर रहे तीन युवकों की गतिविधियों को देखकर रेल सुरक्षा बल सतर्क हो गई और उनकी तलाशी ली गई। इस तलाशी के दौरान इनके बाग से 61 किलो गांजा बरामद हुआ है। जिसकी कीमत तकरीबन 30 लाख बताई जा रही है।

गिरफ्तार युवकों की पहचान बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले आयुष सिंह (22), प्रिंस कुमार (21) और अंकित पाठक (19) के रूप में हुई है। इनके पास से तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।

30 मई को रांची रेलवे स्टेशन पर RPF फ्लाइंग टीम, आरपीएफ पोस्ट और अपराध शाखा की संयुक्त टीम ऑपरेशन ‘NARCOS’ के तहत जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान संबलपुर-जम्मू तवी एक्सप्रेस के बी-3 कोच में तीन युवक चार ट्रॉली बैग और तीन पिट्ठू बैग के साथ बैठे मिले। अधिकारियों को उनकी गतिविधियां कुछ अलग लगी। पूछताछ शुरू हुई तो तीनों के चेहरे का रंग बदलने लगा। सवालों के जवाब भी उलझे हुए थे। यहीं से अधिकारियों का शक और गहरा गया।

RPF अधिकारियों ने जब बैगों के बारे में पूछा तो पहले युवक गोलमोल जवाब देते रहे। लेकिन कड़ा रुख अपनाने के बाद उनकी चुप्पी टूट गई। आखिरकार उन्होंने कबूल कर लिया कि बैगों में गांजा रखा हुआ है। इसके बाद पूरी टीम सतर्क हो गई। ट्रेन को बीच रास्ते में रोकना संभव नहीं था, इसलिए आरोपियों को उनके सामान के साथ नामकुम रेलवे स्टेशन पर उतारा गया।

बैग खुले तो सामने आ गया नशे का जखीरा
नामकुम स्टेशन पर जब एक-एक बैग की तलाशी ली गई तो अंदर से पैकेटों का ढेर निकलने लगा। कुल 61 पैकेट बरामद हुए। जांच में इनका कुल वजन 61 किलोग्राम पाया गया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तुरंत बरामद सामग्री की जांच कराई। डीडी किट से परीक्षण में पुष्टि हुई कि यह गांजा ही है। बरामद खेप की अनुमानित कीमत लगभग 30.50 लाख रुपये आंकी गई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में गांजा कहां से लाया गया था और इसे किस नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचाया जाना था।

जांच अधिकारियों का मानना है कि नशा तस्कर अक्सर लंबी दूरी की ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं। भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में सामान के बीच प्रतिबंधित पदार्थ छिपाकर एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है। हालांकि इस बार आरपीएफ की सतर्कता ने उनकी योजना पर पानी फेर दिया।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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