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प्रसिद्ध फिल्मकार,लेखक व पत्रकार खवाज़ा अहमद अब्बास की स्मृति में इप्टा जमशेदपुर की 7 दिवसीय बालरंग कार्यशाला शुरू

On: June 1, 2026 5:20 PM
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छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य नाचा शैली के प्रख्यात कलाकार व निर्देशक निसार अली के निर्देशन में बच्चे सीखेंगे अभिनय व नाटक से व्यक्तित्व निर्माण
7 जून की शाम ट्राइबल कल्चर सेंटर में होगी बच्चों की नाट्य प्रस्तुति

जमशेदपुर: जन्म के साथ ही इंसान अभिनय करना शुरू देता है और जीवन भर अभिनय सीख रहा होता है। नाटक जीवन जीने की शैली है, जिससे हम अनुशासन सीखते है।

– छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य के नाचा शैली के प्रसिद्ध कलाकार व निर्देशक निसार अली की इस ज़रूरी सीख के साथ रविवार को धातकीडीह कम्युनिटी सेंटर में भारतीय जननाट्य संघ, जमशेदपुर के तत्वाधान में सातदिवसीय बालरंग कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।

सुबह 6 से दोपहर 12 बजे तक चलने वाली कार्यशाला में कुल 22 बाल कलाकार भाग ले रहे है।

नाचा शैली लोक संगीत, नृत्य और हास्य-व्यंग्य का एक अनूठा संगम है, जिसे छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में रात भर खुले मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। इस बार इप्टा जमशेदपुर की कार्यशाला में प्रतिभागी नाचा की बारीकियां सीखेंगे।
इस दौरान बाल प्रतिभागी स्पीच-मूवमेंट, नृत्य, अभिनय और अपने आसपास की दुनिया को जानने समझना सीखेंगे।

पहले दिन की कार्यशाला में बच्चों को फिजिकल एक्सरसाइज़, वॉइस प्रोजेक्शन, हारमोनियम से अलंकार, नृत्य अभ्यास व संबंधित गतिविधियां पार्थ बनर्जी, नम्रता नाग, श्वेता, रामचन्द्र मार्डी और उर्मिला हाँसदा ने कराया। शायर अहमद बद्र ने बच्चों को इप्टा के जन्म की कहानी बताई। इसके बाद कार्यशाला का संचालन छत्तीसगढ़ रायपुर से आए निसार अली ने बच्चों से रचनात्मक तरीके से पहचान कर नाटक में चलना, हँसना, रोना, बोलना खेल-खेल में सिखलाया। कार्यशाला स्थल में बच्चों के बनाए पोस्टर भी प्रदर्शित किये गए है, जिनमें ‘हम एक है’, किताबें करती हैं बातें’, ‘ख़ामोशी तोड़ो वक़्त आ गया है’, ‘ हम हैं एक जैसे’, ‘होंगे कामयाब एक दिन’ ‘दोस्त हैं हम’ इत्यादि जैसे वाक्यों के माध्यम से बच्चे शब्दों का उच्चारण करना सीख रहे है। आज की कार्यशाला में इप्टा के संरक्षक कॉमरेड शशि कुमार, निर्मला, शायर संजय सोलोमन, अर्पिता उपस्थित रहे। वही बतौर मेहमान शिवलाल सागर, गौतम गोप, तरुण कुमार ने कार्यशाला में आकर बच्चों को शुभकामनाएं दी।

बताते चलें कि इप्टा दशकों से अपने पुरखो व उनकी सीखों को याद करने की विरासत को सँजोती चली आ रही है। साल भर प्रगतिशील पुरखों को अलग-अलग कार्यक्रम और गतिविधियों के जरिए याद किया जाता हैं। इप्टा देश भर में सक्रिय स्वयंसेवी सांस्कृतिक संगठन है, जो जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर भारत की आजादी की लड़ाई के समय से ही काम कर रही है। पिछले वर्ष बालरंग की जानी मानी हस्ती रेखा जैन का जन्मशताब्दी इप्टा जमशेदपुर ने मनाया गया था। इस वर्ष इप्टा के पुरखे साथी खवाज़ा अहमद अब्बास को बालरंग कार्यशाला समर्पित है। प्रसिद्ध लेखक, फिल्मकार, पत्रकार खवाज़ा अहमद अब्बास के स्मृति दिवस 7 जून की शाम सात दिवसीय कार्यशाला का समापन ट्राइबल कल्चर सेंटर में बच्चों की नाट्य प्रस्तुति के साथ होगा।

Satish Sinha

मैं सतीश सिन्हा, बीते 38 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ा हूँ। इस दौरान मैंने कई अखबारों और समाचार चैनलों में रिपोर्टर के रूप में कार्य करते हुए न केवल खबरों को पाठकों और दर्शकों तक पहुँचाने का कार्य किया, बल्कि समाज की समस्याओं, आम जनता की आवाज़ और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर को इमानदारी से उजागर करने का प्रयास भी निरंतर करता रहा हूँ। पिछले तकरीबन 6 वर्षों से मैं 'झारखंड वार्ता' से जुड़ा हूँ और क्षेत्रीय से जिले की हर छोटी-बड़ी घटनाओं की सटीक व निष्पक्ष रिपोर्टिंग के माध्यम से पत्रकारिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूँ।

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