धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से दिया इस्तीफा, प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार
झारखंड वार्ता
नई दिल्ली। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार, 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में हुआ है, जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों के बीच लंबे समय से असंतोष और विरोध प्रदर्शन की स्थिति बनी हुई है। हाल के दिनों में छात्रों के आंदोलन ने भी राजनीतिक माहौल को गरमा दिया था।
प्रह्लाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय
शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद प्रह्लाद जोशी के सामने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करने की बड़ी चुनौती होगी। जोशी पहले से केंद्र सरकार में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
प्रह्लाद जोशी ने 30 मई 2019 को पहली बार कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली थी। उस समय उन्हें संसदीय कार्य, कोयला एवं खान मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। जून 2024 में केंद्र में नई सरकार बनने के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी।
जोशी धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार निर्वाचित हुए हैं।
छात्र आंदोलन के बीच हुआ बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम
परीक्षा व्यवस्था और कथित पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों के बीच विरोध का माहौल बना हुआ था। आंदोलन के दौरान छात्रों की ओर से सरकार से जवाबदेही, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई जा रही थी।
20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी और जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बाद सरकार की ओर से भी छात्रों के मुद्दों पर संवाद और परीक्षा व्यवस्था में सुधार का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई थी।
अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के बाद शिक्षा क्षेत्र में आगे की रणनीति पर सबकी निगाहें टिक गई हैं। माना जा रहा है कि सरकार के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल करना, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना और भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान करना होगी।
