जेपीएससी में भ्रष्टाचार की जांच के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीएम को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाये हैं.
- हिंदी समाचार
- स्थानीय
- झारखंड
- रांची
- जेपीएससी में भ्रष्टाचार की जांच के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीएम को पत्र लिखकर लगाए गंभीर आरोप.
रांची23 घंटे पहले
- लिंक की प्रतिलिपि करें

आयोग सदस्य ने भी दिया
जमाल अहमद ने पद का दुरुपयोग कर बनायी अकूत संपत्ति, एसीबी जांच हो : बाबूलाल
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में भ्रष्टाचार पर सरकार के हमले के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी सदस्य डॉ जमाल अहमद पर गंभीर आरोप लगाये हैं.
मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि जमाल अहमद ने पिछले कुछ वर्षों में अपने पद का दुरुपयोग किया है और बड़े पैमाने पर चल-अचल संपत्ति का बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लिया है. उनके पास रांची में तीन से चार हजार वर्गफीट का आलीशान फ्लैट है. इसके अलावा उन्होंने हजारीबाग में भी बड़े पैमाने पर अचल संपत्ति अर्जित की है.
उन्होंने बताया कि जमाल अहमद पूर्व में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक थे. वर्ष 2008 में उनकी नियुक्ति लेक्चरर पद पर हुई. उस नियुक्ति प्रक्रिया में हुई भारी धांधली की जांच सीबीआई कर रही है. ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि अगर किसी व्यक्ति की नियुक्ति की प्रक्रिया जांच एजेंसियों के दायरे में है तो उसे जेपीएससी का सदस्य कैसे बना दिया गया.
ऐसे सदस्य को तत्काल पदमुक्त किया जाये : मरांडी
मरांडी ने कहा है कि जब ऐसे दागी और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे व्यक्ति को जेपीएससी का सदस्य बनाया जाएगा तो राज्य के लाखों मेधावी युवाओं का इस संस्था पर भरोसा कैसे बचेगा?
यह प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। ऐसे में जमाल अहमद द्वारा अर्जित की गई सभी चल-अचल संपत्तियों, उनके बैंक खातों, विभिन्न निवेशों और आय के स्रोतों की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा अविलंब गहन जांच की जानी चाहिए। साथ ही उन्हें तुरंत कार्यमुक्त किया जाए.
5 दिन में सार्वजनिक करूंगा अपनी संपत्ति, मेरे परिवार ने नहीं लिया कोई लाभ: जमाल विशेष संवाददाता रांची : जेपीएससी सदस्य डॉ जमाल अहमद ने बाबूलाल मरांडी के आरोपों का करारा जवाब दिया है. उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद, झूठा और राजनीति से प्रेरित बताया है. उन्होंने बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि सार्वजनिक जीवन का सबसे बड़ा मूल्य पारदर्शिता है. ये सार्वजनिक जीवन में रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगले पांच दिनों के अंदर वह अपनी सभी चल-अचल संपत्ति और आय का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करेंगे, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल कायम की जा सके. उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो वे किसी मामले में आरोपी हैं और न ही किसी अदालत ने उन्हें व्याख्याता नियुक्ति से जुड़े कथित घोटाले में दोषी ठहराया है. जिनके खिलाफ जांच एजेंसियों को सबूत मिले हैं उनके नाम सार्वजनिक हैं. ऐसे में बिना किसी तथ्य या कानूनी आधार के उनका नाम इस केस से जोड़ना सिर्फ भ्रम फैलाने की कोशिश है.
बिना किसी तथ्य के भ्रम फैलाने की कोशिश: अहमद जमाल अहमद ने बताया कि उनकी पत्नी वर्ष 1995-96 में इतिहास विषय में यूनिवर्सिटी टॉपर थीं. वर्ष 2008 में जब उन्होंने जेपीएससी के लिए आवेदन किया तो उन्हें 2022 में साक्षात्कार के लिए बुलाया गया, लेकिन उन्होंने साक्षात्कार में भाग नहीं लिया. उन्होंने दावा किया कि उनके दोनों बेटों ने आज तक कभी भी जेपीएससी परीक्षा के लिए आवेदन नहीं किया है और न ही उनके परिवार ने कभी उनके पद का कोई अनुचित लाभ उठाया है.

