July 26, 2026

10 वर्षों से जिले में उत्पाद विभाग का है कब्जा : उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग वित्त विभाग के नियमों व आदेशों को नजरअंदाज कर संचालित हो रहा है.

orig_origdownload-31685836473_1785016913.jpg


झारखंड सरकार का उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग इन दिनों वित्त विभाग के नियमों और आदेशों को नजरअंदाज कर काम कर रहा है. पिछले एक दशक (वर्ष 2016) से विभाग में कई अधिकारी बिना प्रमोशन के एक ही पद पर ‘प्रभारी’ पद पर जमे हुए हैं. जब भी कोई विभागीय स्थानांतरण होता है तो केवल उनका जिला बदलता है, लेकिन ‘प्रभारी अधीक्षक’ के रूप में उनका रुतबा और प्रभाव वही रहता है। यह स्थिति तब है जब राज्य के वित्त विभाग ने इसी साल 19 मई को एक सख्त पत्र जारी किया था. पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि ”उच्च पद का स्वतंत्र संचालन प्रभार देने की व्यवस्था अविलंब समाप्त की जाए.” वित्त विभाग ने स्पष्ट किया था कि यदि अति आवश्यक हो तो अल्प अवधि के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन लेकर मूल पद पर रहते हुए अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है। इसके बावजूद उत्पाद विभाग में यह व्यवस्था बदस्तूर जारी है. इन जिलों में 10 साल से प्रभारी अधीक्षक ही कार्यभार संभाल रहे हैं. 2016 से इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी लगातार अलग-अलग जिलों में प्रभारी अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इनमें इंस्पेक्टर उत्पाद सुजीत कुमार पलामू में प्रभारी अधीक्षक बने हुए हैं. इंस्पेक्टर उत्पाद अनिल कुमार शर्मा लोहरदगा में प्रभारी अधीक्षक के पद पर हैं. इंस्पेक्टर उत्पाद विमला लकड़ा लंबे समय तक देवघर में प्रभारी अधीक्षक रह चुकी हैं. सरायकेला में इंस्पेक्टर उत्पाद क्षितिज विजय मिंज प्रभारी अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं. गिरिडीह में इंस्पेक्टर उत्पाद शिव कुमार साहू प्रभारी अधीक्षक के पद पर भी हैं. डीपीसी की बैठक में न तो पदोन्नति हो रही है और न ही नियमित नियुक्तियां। विभागीय नियमानुसार अधिकारियों की समय पर पदोन्नति के लिए हर साल जुलाई माह में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक आयोजित की जानी चाहिए। नियमत: पात्र अधिकारियों की फाइलें आगे बढ़ानी चाहिए, लेकिन आबकारी विभाग में लंबे समय से डीपीसी की बैठकें ठंडे बस्ते में हैं। इससे निरीक्षकों को नियमित अधीक्षक के पद पर प्रोन्नति नहीं मिल पा रही है. उप निरीक्षकों (इंस्पेक्टरों) को इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति नहीं दी जा रही है. 85% पद खाली, कैसे होगा काम? विभाग द्वारा जारी आधिकारिक बल सूची के आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि उत्पाद विभाग में मानव संसाधन का भारी संकट है.

Source link

ख़बर को शेयर करें।

You may have missed