
झारखंड वार्ता संवाददाता
जामताड़ा। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के पुलिस एनकाउंटर मामले में नया मोड़ आ गया है। परिजनों ने इस मुठभेड़ को सुनियोजित साजिश बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। सुजीत सिन्हा की सास उषा देवी ने मीडिया से बातचीत में प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और एनकाउंटर की परिस्थितियों पर कई सवाल खड़े किए।
उषा देवी ने कहा कि सुजीत सिन्हा जेल से बाहर निकलने से बचता था, क्योंकि उसे अपनी जान का खतरा था। ऐसे में वह पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश क्यों करेगा और पुलिस पर गोली क्यों चलाएगा, यह समझ से परे है। उन्होंने दावा किया कि पहले भी सुजीत ने सुरक्षा कारणों से जेल से बाहर जाने से इनकार किया था।
परिजनों ने एनकाउंटर के बाद जारी तस्वीरों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि रात में सामने आई तस्वीर में सुजीत सिन्हा सड़क पर दिखाई दे रहा था, जबकि बाद में जारी तस्वीर में उसका शव जंगल में दिखाया गया। इसे लेकर उन्होंने पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उषा देवी ने यह भी कहा कि इस घटना का सबसे अधिक असर सुजीत के 12 वर्षीय बेटे अक्षत पर पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चाईबासा जेल में बंद उसकी मां से बच्चे की नियमित मुलाकात नहीं हो पा रही है। साथ ही जेल प्रशासन पर भोजन और दवा उपलब्ध कराने में लापरवाही का भी आरोप लगाया। उनका दावा है कि पिता की मौत और मां के जेल में रहने से बच्चा गहरे सदमे में है।
परिजनों ने सरकार से मांग की है कि पूरे एनकाउंटर की न्यायिक या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या साजिश सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, पुलिस पहले ही दावा कर चुकी है कि सुजीत सिन्हा ने हिरासत से भागने की कोशिश के दौरान पुलिस पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में उसकी मौत हुई। अब मामले को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।




