
JPSC नियुक्ति घोटाले की जांच में अब तक परीक्षा माफिया, दलाल और आउटसोर्सिंग एजेंसी के लोग CID के निशाने पर थे, लेकिन अब जांच की आंच सीधे आयोग के बड़े अधिकारियों तक पहुंचने वाली है।
8 अगस्त को CID ने JPSC के तीन मौजूदा सदस्यों को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है—जिससे पूरे आयोग में खलबली मच गई है और आने वाले दिनों में कई बड़े नाम जांच के घेरे में आने के संकेत मिल रहे हैं।
रांची: झारखंड के बहुचर्चित JPSC नियुक्ति घोटाले की जांच अब उस मुकाम पर पहुंचती दिख रही है, जहां सीआईडी का हाथ परीक्षा माफियाओं और बिचौलियों से आगे बढ़कर आयोग के बड़े अधिकारियों के गिरेबान तक पहुंचने वाला है। 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी और OMR शीट से छेड़छाड़ के मामले में जांच एजेंसी ने अब सीधे जेपीएससी के मौजूदा सदस्यों से पूछताछ की तैयारी शुरू कर दी है।
8 अगस्त को हुई बड़ी कार्रवाई में CID ने JPSC के तीन मौजूदा सदस्यों को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। इनमें सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और एक अन्य सदस्य शामिल हैं। माना जा रहा है कि इनसे पूछताछ के बाद जांच की कई अहम कड़ियां जुड़ सकती हैं।
पूर्व चेयरमैन से घंटों पूछताछ
जांच के घेरे में आयोग के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते भी आ चुके हैं। CID उनसे सात घंटे से अधिक समय तक पूछताछ कर चुकी है। परीक्षा विवाद के बीच खियांग्ते ने हाल में अपने पद से इस्तीफा दिया था। अब जांच एजेंसी आयोग के भीतर फैसलों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं को खंगाल रही है।
वहीं, जेपीएससी की पूर्व सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को CID पहले ही हिरासत में लेकर पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर ले चुकी है। उनसे पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
TDPL के नेटवर्क पर भी शिकंजा
14वीं सिविल सेवा परीक्षा के आयोजन से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसी TDPL भी जांच के केंद्र में है। CID ने एजेंसी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की और कुछ परिसरों को सील किया है।
जांच के दौरान TDPL के अकाउंटेंट रक्षक सिंह को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया। जांच में यह बात भी सामने आई कि वह खुद इसी परीक्षा की PT परीक्षा में सफल हुआ था।
इसके अलावा TDPL के डायरेक्टर रामवीर सिंह को भी गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। एजेंसी के मार्केटिंग मैनेजर और छह अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है।
40 करोड़ के कथित खेल में मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी
CID की जांच में कथित तौर पर करीब 40 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई है। मामले में अभय कुमार तिवारी को कथित मास्टरमाइंड के रूप में गिरफ्तार किया गया है। वह सरकारी कर्मचारी बताया जा रहा है और जांच एजेंसी के अनुसार पिछले 13 वर्षों में उसने 12 परीक्षाएं पास की हैं।
अभय तिवारी से पूछताछ के बाद जांच की आंच पलामू तक भी पहुंची। वहां सरकारी शिक्षक रविशंकर कुमार और संतोष सिंह के ठिकानों पर छापेमारी कर कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
छह जिलों से बिहार तक छापेमारी
CID ने जांच का दायरा अब रांची से बाहर भी बढ़ा दिया है। रांची, धनबाद, हजारीबाग, बोकारो और पलामू समेत कई स्थानों के साथ बिहार में भी करीब 18 ठिकानों पर छापेमारी की गई है। इन ठिकानों का संबंध कथित तौर पर कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और परीक्षा से जुड़े नेटवर्क से बताया जा रहा है।
20 गिरफ्तार, कई चेहरे अभी जांच के दायरे में
OMR शीट में कथित छेड़छाड़ और पेपर लीक से जुड़े इस मामले में अब तक 20 लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है। लेकिन मौजूदा कार्रवाई से साफ संकेत मिल रहे हैं कि जांच अभी थमी नहीं है। अब CID उन लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है, जिनकी पहुंच परीक्षा व्यवस्था और आयोग के निर्णयों तक थी।
इधर, छात्रों के लगातार विरोध और आमरण अनशन के बीच JPSC ने मुख्य परीक्षा समेत नौ प्रतियोगी परीक्षाओं को फिलहाल स्थगित कर दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीन मौजूदा सदस्यों से पूछताछ के बाद CID की जांच किस दिशा में जाती है और क्या इस पूरे मामले में आयोग के और बड़े अधिकारियों की भूमिका सामने आती है। आने वाले दिनों में यह जांच JPSC के भीतर बैठे और किन चेहरों तक पहुंचती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।




