
जमशेदपुर:महात्मा गांधी के जमशेदपुर आगमन के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर माइकल जॉन ऑडिटोरियम में शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए बांग्ला की प्रख्यात लेखिका जोया मित्रा ने “एकला चलो रे..” की तर्ज़ अब एक बार फिर चलने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि गांधी जी ने आज़ादी की लड़ाई को आगे बढ़ाया था। अहिंसा और नैतिकता की ताकत थी उनके पास। सत्याग्रह गांधी का सबसे बड़ा शस्त्र रहा था।

अमरीका में एक बार शेयर मार्केट में हज़ार युवाओं ने एक नायाब आंदोलन किया था। युवाओं ने सरकार की ग़लत नीतियों का अहिंसात्मक आंदोलन किया। यही धारा को आगे लेकर चलने की जरूरत है।

मजदूरों और
किसानों के आंदोलन का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश में फिलहाल ख़राब हालात बनाए गए हैं। गांधी का रास्ता इनसे निपटने में सफ़ल हो सकता है।
सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए युवाओं को अपनी जिम्मेदारी लेनी ही होगी और वह लेने लगी है आज। उसे आज Gen Z क्यों कहा जा रहा है, जो जंतर मंतर में अपनी आवाज उठा रहे थे। वे सभी युवा तो हमारे ही बच्चे हैं। आज हम काफ़ी संकट के दौर से गुजर रहे हैं और इसके लिए वर्तमान सत्ता है। ऐसी सत्ता के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
सवाल उठाना तो आज बंद कर दिया गया है, क्योंकि लोगों को इसके लिए विवश किया गया है एक योजना के तहत। गांधी जी ने संयम और अनुशासन को अपने जीवन लागू किया और देशवासियों को प्रेरित भी किया है।
भौतिक सुख सुविधा के पीछे युवाओं को ज़बरन भगाया जाता रहा है। उन्हें नैतिक ज्ञान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि गांधी का रास्ता और आदर्श आज भी प्रासंगिक है, इस बात को स्वीकार करना होगा।

सर्व सेवा संघ के अध्यक्ष चंदन पाल ने अपने जीवन के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि
सत्ता का मुकाबला सत्य और साहस से होना संभव है।
उन्होंने कहा कि नौ अगस्त भारत छोड़ो आंदोलन का ८४ साल और गांधी जी के जमशेदपुर आने के एक सौ साल पूरे होने पर सभी बधाई।
सावन में शिव जी की पानी डालने के कांवड़ यात्रा चल रही है। तीर्थ स्थल बने।
महात्मा गांधी जहां जहां गए, वे प्रेरणा स्थल बने। हज़रत शाही के गांव में हिंदू लोग मुस्लिम घरों में दूध सेवई ले जाकर ईद मनाते हैं। मुस्लिम भी हिंदुओं के त्योहारों में जाते हैं मुजफ्फरपुर में। इसी तरह देश भर आपसी प्रेम और सद्भाव का वातावरण ही रहा है।
यूसुफ मेहरा ने अंग्रेजो भारत छोड़ो का नारा पहली बार दिया।
आज़ादी के आंदोलन के दौरान हिंदू मुस्लिम एकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सभी की भागीदारी रही है। गांधी जी इसके मुख्य सूत्रधार रहे थे।
आज देश की क्या हालत क्या है सभी को मालूम है। विज्ञापन में देश के प्रधानमंत्री ने छह हजार करोड़ खर्च किए और यू पी के योगी जी उनका कीर्तिमान तोड़ दिया। यह हाल है। डेश में झूठ का बोलबाला है। इससे निपटने के लिए सभी को आगे आना होगा। मीडिया की भूमिका को लेकर भी उन्होंने कहा कि इस पर भी ठोस काम करना होगा देश का भला चाहने वालों को। ज्यादातर मीडिया प्रबंधन वर्तमान समय में बिक गए हैं। RSS की कमाई पर भी उन्होंने सवाल किया कि कैसे यह सब चल रहा है और सरकार सिर्फ़ चुप ही नहीं बल्कि उसके इशारे पर काम कर रही है, उसकी जाँच क्या करेगी ?
उन्होंने कहा कि डर को दूर भगाकर देश के सभी लोगों खासकर युवाओं को आवाज़ उठानी होगी। वैसे तो इसकी शुरुआत जंतर मंतर में हो गई है।
गांधीवादी समाज सेविका मनीषा बनर्जी ने कहा कि
गांधी जी को लेकर एक अलग तरह की धारणा बना दी गई हैं हाल के दिनों में, जबकि पूरे विश्व में गांधी का एक बड़ा और शानदार रूप कायम है। अकेले चलने की प्रेरणा उनसे मिलती है। गांधी जी ने हिंसा और नफ़रत के ख़िलाफ़ जीवन भर संघर्ष किया। गांधी जी सभी आंदोलन करियों के साथ रहे। आज मीडिया काफ़ी डरा हुआ है। यह आंदोलन की ही देन है।
सबसे भयंकर बात है हमारी चुप्पी। इससे बाहर निकलना होगा। जंतर मंतर के आंदोलन का ज़िक्र करते हुए कहा कि युवाओं के मन मस्तिष्क में पहले से गांधी जी के बारे जो सोच थी, वह ध्वस्त हुआ। गांधी जी के सत्याग्रह की राह अपनाते हुए हमने Gen Z को देखा। फ़िर से गांधी आने ही वाला है हम सभी के अंदर। युवाओं के अंदर। आज कुछ नई चीज़ उभरकर सामने आ रही है। सवाल करना कभी नहीं छोड़ना चाहिए। इसका समय आ गया है। इसमें गांधी हमारे साथ हैं।
इस अवसर पर टाटा वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष शाहनवाज आलम झारखंड सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष शंकर राणा पत्रकार एवं इप्टा के पंकज श्रीवास्तव ने भी अपने विचार रखे।
*पुस्तक का लोकार्पण*
इस कार्यक्रम में डॉक्टर सुखचंद झा द्वारा लिखित पुस्तक झारखंड में महात्मा गांधी का विमोचन किया गया लेखक सुखचंद झा ने बताया कि इस पुस्तक को लिखने के क्रम में मानसिक रूप से गांधी के सहयात्री होने का अवसर मिला जो अद्भुत है। मैं इस पुस्तक में यथासंभव तथ्यों का वास्तविक संकलन का प्रयास किया है। पुस्तक के प्रकाशक सर्व सेवा संघ प्रकाशन के संयोजक अशोक भारत ने बताया कि इसकी स्थापना आचार्य विनोबा भावे की प्रेरणा से हुई थी और इसका उद्देश्य अपनी पुस्तकों के जरिए समाज और नई पीढ़ी को भारत की उदारवादी और स्वतंत्रता आंदोलन की परंपरा और मूल्यों से अवगत कराना है। हमारे ऊपर कई प्रकार के संकट आए हैं। यहां तक कि मनगढ़ंत आरोप लगाकर हमारे परिसर को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन फिर भी साहित्य का प्रकाशन निर्बाध रूप से जारी है।
*पैनल डिस्कशन*
इस समारोह में *मीडिया डिबेट का बदलाता स्वरूप* विषय पर भी एक पैनल डिस्कशन रखा गया था जिसमें युवा विचारक आयुष चतुर्वेदी, समाजसेवी मंथन और पूर्बी पाल, नेताजी सुभाष बोस विश्वविद्यालय के व्याख्याता अनमोल, ने अपने विचार रखे। इस संवाद की एंकरिंग करते हुए शुभम तन्मय ने चर्चा की शुरुआत करते हुए इस विंदु पर केंद्रित किया कि:-
*मीडिया बदल रहा है, और उसके साथ बहस का मिज़ाज भी। कभी खबर का काम था सवाल पूछना, अब कई बार सवाल से पहले ही जवाब तय दिखाई देता है। स्टूडियो में बहस कम और शोर की प्रतियोगिता ज़्यादा सुनाई देती है। टीआरपी, वायरल क्लिप और सोशल मीडिया की रफ्तार के बीच यह पूछना ज़रूरी है कि आखिर हम किस तरह का सार्वजनिक संवाद तैयार कर रहे हैं।*
*सम्मान -पत्र वितरण*
गांधी आगमन के 100 वर्ष के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए महात्मा गांधी को संबोधित कर पत्र- लेखन स्लोगन और पोस्टर बनाने की प्रतियोगिता रखी गई थी जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 1.भाविका मुर्मू- केरल पब्लिक स्कूल class 11
2.शुभांगी सामद – केरल पब्लिक स्कूल class 11
3.ऐश्वर्या पराशर – केरल पब्लिक स्कूल class 11
4.वर्षा – एआई डब्ल्यूसी, जमशेदपुर class 12
5 .Komal Kumari , graduate college
6.Santoshi manji – केरल पब्लिक स्कूल class 12
7.सुरभि हरपाल- डीबीएमएस जमशेदपुर class 9
8.सुनया चंद्रा ,शिक्षक रामकृष्णन स्कूल को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अर्पिता,रईस अफरीदी,विकास कुमार,निलेश,निशान सिंह,प्रेम शर्मा,स्वाति,कुमारी,पूजा कुमारी,प्रदीप रजक,
विवेक कुमार,विक्रम, ज्ञानदीप आदि ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
गीत की प्रस्तुति लिटिल स्टार के बच्चों के द्वारा की गई।आज के कार्यक्रम में स्वागत ओम प्रकाश धन्यवाद अंकुर शाश्वत और संचालन अरविंद अंजुम ने किया।





