
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (CGL) 2023 में कथित अनियमितताओं की जांच अब और तेज हो गई है। मामले की गहराई से जांच के लिए सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक ने 17 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। इस टीम की कमान एसटीएफ के आईजी अनूप बिरथरे को सौंपी गई है। टीम में सात अन्य आईपीएस अधिकारियों के साथ डीएसपी, इंस्पेक्टर और दारोगा स्तर के पुलिस अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।
SIT के गठन के बाद जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। गुरुवार को टीम ने केस से संबंधित 37 संदिग्धों को नोटिस जारी कर पूछताछ की। जांच टीम अब परीक्षा में कथित गड़बड़ी, अभ्यर्थियों को प्रभावित करने वाले नेटवर्क और पैसों के लेन-देन समेत पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
JSSC CGL परीक्षा का आयोजन 21 और 22 सितंबर 2024 को किया गया था। परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप सामने आए। विवाद बढ़ने के बाद इस मामले में 1 जनवरी 2025 को सीआईडी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद सीआईडी ने जांच शुरू की और मामले से जुड़े कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की।
जांच के दौरान अब तक दर्जनभर से अधिक आरोपितों को जेल भेजे जाने की बात सामने आई है। शुरुआती जांच में कथित तौर पर ऐसे लोगों की भूमिका सामने आई थी, जो अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराने का दावा कर उनसे पैसे वसूल रहे थे।
मामले में एक अहम पहलू यह भी रहा कि सीआईडी ने पहले झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल अपने शपथपत्र में पेपर लीक होने की बात से इनकार किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, कुछ दलालों और एजेंटों ने अभ्यर्थियों को वाट्सऐप के जरिए प्रश्नों के उत्तर भेजे और इसे पेपर लीक से जोड़कर पैसे की वसूली की।
सीआईडी ने कथित तौर पर इस वसूली के नेटवर्क से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब पूरे मामले का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है।
मामले में उस समय नया मोड़ आया, जब सीआईडी ने टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान उसके द्वारा कथित तौर पर परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं से जुड़ी अहम जानकारी दिए जाने की बात सामने आई।
जांच एजेंसी के अनुसार, अभय तिवारी के बयान में कथित तौर पर ऐसे नेटवर्क की जानकारी मिली, जिसमें रिश्वत के बदले अयोग्य अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने का खेल होने का आरोप है। इस जानकारी के सामने आने के बाद सीआईडी ने जांच का दायरा और विस्तृत कर दिया।
SIT के गठन के बाद जांच एजेंसी अब परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। इसमें कथित तौर पर अभ्यर्थियों से संपर्क, बिचौलियों की भूमिका, पैसों के लेन-देन, परीक्षा से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक स्तर के लोगों की भूमिका तथा परिणाम को प्रभावित करने की संभावित कोशिशों की जांच शामिल है।
37 संदिग्धों को नोटिस जारी कर पूछताछ किए जाने के बाद आने वाले दिनों में जांच और आगे बढ़ सकती है। SIT अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अनियमितताओं का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।





