
नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की 7.8 प्रतिशत की मजबूत विकास दर के आंकड़े सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई दी है। पीएम मोदी ने इस आर्थिक प्रदर्शन को भारत की मजबूती, स्थिरता और क्षमता का प्रमाण बताते हुए लोगों से ‘स्वदेशी’ और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश के भीतर होने वाला खर्च घरेलू बाजार को मजबूती देता है और इससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनाए रखने में मदद मिलती है।
प्रधानमंत्री ने इंस्टाग्राम पर रील शेयर करते हुए देशवासियों से अपील की कि, अगर वे छुट्टियों की योजना बना रहे हैं तो विदेश जाने के बजाय भारत के पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दें। इसी तरह शादियों के लिए भी देश के खूबसूरत डेस्टिनेशंस को चुनने का सुझाव देते हुए उन्होंने ‘वेड इन इंडिया’ का मंत्र अपनाने की बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में शादी के लिए कई ऐसे खूबसूरत स्थान हैं, जिन्हें देश-विदेश के लोग पसंद करते हैं। ऐसे में विदेश में शादी करने पर खर्च होने वाली रकम का बड़ा हिस्सा भारत में ही खर्च किया जा सकता है। पीएम मोदी ने कहा, अगर जरूरत न हो, तो सोना भी नहीं खरीदना चाहिए।
हालांकि, प्रधानमंत्री की इस अपील का अर्थ यह नहीं है कि लोगों को विदेश यात्रा, विदेश में शादी या सोने की खरीद पूरी तरह बंद कर देनी चाहिए। उनके संदेश में जरूरत और गैर-जरूरी खर्च के बीच अंतर किया गया है। यानी बड़े खर्च का फैसला अपनी आर्थिक स्थिति, वास्तविक जरूरत और उपयोगिता को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने पहली तिमाही में दर्ज 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि को भारत की मजबूत आर्थिक क्षमता से जोड़ते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन में व्यवधान जैसी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। उन्होंने इसे देश की अदम्य क्षमता और आर्थिक स्थिरता का प्रमाण बताया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, ‘स्वदेशी’ और आत्मनिर्भरता पर जितना अधिक जोर दिया जाएगा, भारत की आर्थिक मजबूती उतनी ही बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता को भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि देश को आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित भारत बनाने की दिशा में लगातार काम करना होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि यदि देश आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ता रहा तो वर्ष 2047 में भारत अपने युवाओं को एक विकसित देश सौंपने में सफल होगा। पीएम मोदी ने देशवासियों से भारत की आर्थिक प्रगति का जश्न मनाने के साथ-साथ विकास की इस यात्रा में अपनी भूमिका निभाने की अपील की।
उन्होंने कहा, “हम अपनी कड़ी मेहनत से आज अपने युवाओं के सपनों को साकार करेंगे। हमारी नीति सही है। हमारी नीयत साफ़ है। और आज 140 करोड़ देशवासियों की एकजुट शक्ति देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।”
प्रधानमंत्री के इस संदेश में आर्थिक मुद्दों के साथ राजनीतिक टिप्पणी भी देखने को मिली। उन्होंने कहा कि जहां देश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, वहीं कुछ लोग “निराशा के गर्त में डूबे हुए” हैं और “झूठ फैलाकर लोगों को गुमराह” करने में लगे हैं।
इंस्टाग्राम रील के कैप्शन में पीएम मोदी ने लिखा, “7.8% ग्रोथ। मजबूत आंकड़े। उससे भी मजबूत आत्मविश्वास। ‘झूठ की गूंज’ 7.8% ग्रोथ को छिपा नहीं सकती।”
उनके कैप्शन में इस्तेमाल किए गए ‘झूठ की गूंज’ शब्दों को राजनीतिक हलकों में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर निशाने के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री की अपील को व्यावहारिक नजरिए से देखें तो इसका मुख्य संदेश खर्च के फैसलों में प्राथमिकता तय करने का है। विदेश यात्रा या विदेश में शादी करना अपने आप में गलत नहीं है और न ही सोना खरीदना प्रतिबंधित किया गया है। लेकिन गैर-जरूरी खर्च के बजाय घरेलू अर्थव्यवस्था में खर्च करने को प्राथमिकता देने से देश के पर्यटन, सेवा क्षेत्र और स्थानीय कारोबार को फायदा मिल सकता है।
आम परिवारों के लिए इसका अर्थ यही है कि बड़े खर्च से पहले अपनी आय, बचत, जरूरत और भविष्य की वित्तीय योजनाओं को ध्यान में रखा जाए। विदेश में खर्च करने या सोना खरीदने का फैसला केवल भावनात्मक दबाव में लेने के बजाय आर्थिक क्षमता और वास्तविक जरूरत के आधार पर करना समझदारी होगी।
यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री ने घरेलू खर्च को बढ़ावा देने और गैर-जरूरी विदेशी खर्च से बचने की अपील की है। जून 2026 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान भी उन्होंने पश्चिम एशिया में बने युद्ध जैसे हालात और वैश्विक अनिश्चितता का उल्लेख करते हुए कुछ समय के लिए सोना खरीदने से बचने तथा विदेश यात्रा टालने की अपील की थी।







