
वॉशिंगटन: ईरान युद्ध से जुड़ी संवेदनशील और गोपनीय सूचनाओं के अनधिकृत तरीके से मीडिया में लीक होने की जांच के तहत अमेरिकी सरकार के जांचकर्ताओं ने ज्वाइंट स्टाफ के 50 सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट कराया गया है। यह जानकारी द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या ज्वाइंट स्टाफ के कर्मचारियों ने गोपनीय सैन्य सूचनाएं पत्रकारों तक पहुंचाईं। जांच विशेष रूप से अमेरिकी हथियार और गोला-बारूद भंडार में कमी से जुड़ी खबरों के लीक होने पर केंद्रित है।
पिछले महीने कई मीडिया रिपोर्टों में अमेरिका के हथियार भंडार पर बढ़ते दबाव का दावा किया गया था। इनमें लंबी दूरी की मिसाइलों और पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की उपलब्धता में कमी का भी उल्लेख था। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि देश के पास पर्याप्त हथियार भंडार मौजूद हैं।
इन रिपोर्टों के बाद ज्वाइंट स्टाफ के अधिकारियों और कर्मचारियों से पॉलीग्राफ टेस्ट कराए जाने की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, जांच का उद्देश्य लीक के स्रोत का पता लगाने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना भी है।
पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने द न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा कि रक्षा विभाग आंतरिक प्रशासनिक या जांच संबंधी मामलों पर सीधे टिप्पणी नहीं करता। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं के अनधिकृत खुलासे को विभाग बेहद गंभीरता से लेता है।
उन्होंने कहा कि गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा अमेरिका और दुनिया भर में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
अमेरिकी ज्वाइंट स्टाफ में करीब 1,500 से 2,000 सैन्य और असैन्य कर्मचारी काम करते हैं। यह संगठन अमेरिकी सैन्य कमांड के साथ परिचालन रणनीति, रक्षा नीति और युद्ध संबंधी योजनाओं के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रिपोर्ट में जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इतने बड़े पैमाने पर पॉलीग्राफ टेस्ट अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान के शीर्ष स्तर पर असामान्य कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक दौर में इतने बड़े समूह की एक साथ इस तरह जांच किया जाना बेहद दुर्लभ है।
यह कार्रवाई पेंटागन के भीतर संवेदनशील सूचनाओं के लीक होने को लेकर बढ़ती चिंता के बीच हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अनधिकृत लीक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते रहे हैं।
पेंटागन में लीक को लेकर जांच का दायरा बढ़ने से रक्षा विभाग के भीतर गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच आपसी विश्वास को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।



