
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सहायक वन संरक्षक (ACF) और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) परीक्षा में कथित धांधली की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, परीक्षा व्यवस्था में बड़े स्तर पर सेंधमारी के संकेत सामने आ रहे हैं। CID की जांच में गिरफ्तार आरोपियों के बयानों के आधार पर करीब 100 अभ्यर्थियों को पैसे के बदले परीक्षा में लाभ पहुंचाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी अब उन बाहरी विशेषज्ञों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिनके नाम पूछताछ के दौरान सामने आए हैं।
CID की टीम इन विशेषज्ञों की तलाश में दिल्ली और लखनऊ तक छापेमारी कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ में सामने आए नामों और पहचान की पुष्टि की जा रही है। सत्यापन के बाद संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होने पर उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच में अब तक सामने आए बयानों से परीक्षा में कथित गड़बड़ी के अलग-अलग तरीके सामने आए हैं। आरोप है कि कहीं प्रारंभिक परीक्षा में अभ्यर्थियों को पास कराने के लिए पैसे लिए गए, तो कहीं मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में कथित तौर पर बदलाव किया गया। कुछ अभ्यर्थियों के अंक बढ़वाने के लिए विशेषज्ञ शिक्षकों और प्रोफेसरों से संपर्क किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
बताया गया है कि करीब 100 अभ्यर्थियों से प्रारंभिक परीक्षा में प्रति अभ्यर्थी लगभग पांच लाख रुपये लिए गए। इस हिसाब से करीब पांच करोड़ रुपये की रकम जुटाए जाने का दावा किया गया है।
गिरफ्तार आरोपी प्रदीप के बयान ने जांच को और गंभीर दिशा दी है। उसके मुताबिक, ACF और FRO मुख्य परीक्षा की करीब 30 उत्तर पुस्तिकाएं JPSC के स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर निकाली गईं। आरोप है कि इन कॉपियों को रामवीर को सौंपा गया और बाहर उत्तर लिखवाने के बाद उन्हें दोबारा आयोग में जमा कराया गया।
रामवीर ने भी पूछताछ में इस दावे का समर्थन किया है। उसके बयान के मुताबिक, मुख्य परीक्षा की कुछ कॉपियां रांची और हजारीबाग में बाहर लिखे जाने की व्यवस्था की गई थी।
आरोपी संजय के बयान में परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं से जुड़े एक और कथित तरीके का जिक्र है। उसके अनुसार, FRO मेस के करीब 25 और ACF मेस के लगभग 15 अभ्यर्थियों, यानी कुल करीब 40 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में PDF एडिटर के जरिए कथित बदलाव कर उन्हें पास कराने की कोशिश की गई।
मुख्य आरोपी अभय तिवारी के बयान में कथित धांधली का एक और तरीका सामने आया है। उसके अनुसार, जिन अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर नहीं आते थे, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं को स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर ले जाकर मॉडल उत्तर के आधार पर जवाब लिखवाए जाते थे।
वहीं, जिन अभ्यर्थियों ने खुद उत्तर लिखे थे, उनके अंक बढ़वाने के लिए प्रोफेसरों से संपर्क किए जाने की बात भी उसके बयान में सामने आई है।
आरोपी उस्मान ने CID को दिए बयान में करीब 100 अभ्यर्थियों को अनुचित माध्यम से ACF और FRO परीक्षा में पास कराने की जानकारी दिए जाने का दावा किया है। जांच एजेंसी अब अलग-अलग आरोपियों के बयानों को आपस में मिलाकर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
जांच में सामने आए रामवीर के बयान में पैसों के लेन-देन से जुड़ी अहम जानकारी होने का दावा किया गया है। उसके मुताबिक, FRO परीक्षा में अभय तिवारी, धर्मेंद्र और आनंद की ओर से अभ्यर्थियों के रोल नंबर उपलब्ध कराए गए थे। प्रत्येक अभ्यर्थी के लिए 8 से 10 लाख रुपये तक की रकम तय होने की बात कही गई।
रामवीर के अनुसार, धर्मेंद्र के माध्यम से करीब 10-12 अभ्यर्थियों का काम पूरा हुआ, जबकि अभय तिवारी से जुड़े करीब 50 अभ्यर्थियों के मामले में काम किया गया। इसके बदले अभय तिवारी द्वारा उसे 1.20 करोड़ रुपये नकद दिए जाने का दावा भी बयान में किया गया है।
रामवीर ने जांच एजेंसी को यह भी बताया कि कुछ अभ्यर्थियों की खाली छोड़ी गई OMR शीट भरने के लिए दिल्ली और लखनऊ से लोगों को बुलाया गया था। इसके अलावा मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को रांची और हजारीबाग में बाहर लिखवाने की बात भी उसके बयान में सामने आई है।
अब CID इस पूरे नेटवर्क में शामिल बताए जा रहे बाहरी विशेषज्ञों की पहचान और भूमिका की पुष्टि कर रही है। जांच का अगला अहम चरण यह पता लगाना है कि कौन-कौन से विशेषज्ञ परीक्षा में कथित मदद के लिए झारखंड आए, उन्हें किसने बुलाया और प्रत्येक अभ्यर्थी के बदले कितनी रकम का भुगतान किया गया।






