
जकार्ता: इंडोनेशिया के माउंट अनाक क्राकाटोआ में रविवार को हुए जोरदार ज्वालामुखी विस्फोट के बाद हालात बिगड़ गए। विस्फोट से निकला राख का विशाल गुबार करीब 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया। ज्वालामुखीय राख के हवाई मार्गों में फैलने के कारण जावा और सुमात्रा के कई हिस्सों में हवाई यातायात प्रभावित हुआ। इसका असर सैकड़ों उड़ानों पर पड़ा है। फिलहाल जान-माल के नुकसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित अनाक क्राकाटोआ शुक्रवार देर रात से लगातार सक्रिय है। इंडोनेशियाई अधिकारियों ने इसे 2 जुलाई से अलर्ट लेवल-3 पर रखा हुआ है। यह देश में ज्वालामुखियों के लिए दूसरा सबसे ऊंचा चेतावनी स्तर है।
सोएकार्नो-हट्टा एयरपोर्ट पर उड़ानें प्रभावित
ज्वालामुखी से निकली राख के एयरपोर्ट के आसपास पहुंचने के बाद जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर रविवार दोपहर 1:30 बजे तक उड़ान संचालन निलंबित रहा। एयरपोर्ट ऑपरेटर अंगकासा पुरा के मुताबिक, इस व्यवधान से कुल 301 उड़ानें प्रभावित हुईं। इनमें 58 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शामिल हैं।
राख का गुबार हवाई मार्गों की ओर बढ़ने के बाद कई एयरलाइनों ने जकार्ता आने-जाने वाली उड़ानों को रद्द या पुनर्निर्धारित किया। सिंगापुर एयरलाइंस ने रविवार को जकार्ता की अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दीं। वहीं एयरएशिया ने भी कई उड़ानों के रद्द होने और समय में बदलाव की जानकारी दी।
इंडोनेशिया की राष्ट्रीय विमानन कंपनी गरुड़ इंडोनेशिया ने यात्रियों से एयरपोर्ट के लिए रवाना होने से पहले आधिकारिक माध्यमों से अपनी उड़ान की स्थिति जांचने की अपील की है।
एयरपोर्ट पर फंसे सैकड़ों यात्री
उड़ानों के रद्द और प्रभावित होने से सोएकार्नो-हट्टा एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में यात्री फंस गए। यात्रियों के मुताबिक, उन्हें उड़ान में देरी या रद्द होने की जानकारी तो मिल रही थी, लेकिन उड़ान सेवाएं दोबारा कब सामान्य होंगी, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही थी।
राख से आंखों में जलन, स्कूलों ने रद्द की बाहरी गतिविधियां
ज्वालामुखी विस्फोट का असर आसपास के इलाकों में भी दिखाई दिया। ज्वालामुखीय राख के कारण स्थानीय लोगों और छात्रों ने आंखों में जलन की शिकायत की। इसके बाद कई स्कूलों ने बाहरी गतिविधियां रद्द कर दीं।
कुछ इलाकों में मछली पकड़ने के लिए जाने वाली यात्राएं भी रद्द की गईं। अधिकारियों ने लोगों को राख गिरने की स्थिति में सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है।
कृत्रिम बारिश कराने की तैयारी
इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी BNPB ने बताया कि मौसम में बदलाव से जुड़े अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत क्लाउड सीडिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर कृत्रिम बारिश कराने पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बारिश के जरिए हवा में मौजूद ज्वालामुखीय राख को नीचे बैठाने में मदद करना है।
प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को मास्क पहनने, आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मे का इस्तेमाल करने और बाहरी गतिविधियों को सीमित रखने की सलाह दी गई है। साथ ही पानी के स्रोतों को ढककर रखने और वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है, क्योंकि राख के कारण दृश्यता कम हो सकती है।
सेमेरू ज्वालामुखी में भी विस्फोट
इसी बीच इंडोनेशिया के एक अन्य सक्रिय ज्वालामुखी माउंट सेमेरू में भी रविवार को विस्फोट हुआ। इससे ज्वालामुखी के शिखर से करीब एक किलोमीटर ऊपर तक राख का गुबार उठा।
देश की ज्वालामुखी निगरानी एजेंसी PVMBG ने लोगों को सेमेरू के क्रेटर से कम से कम पांच किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने गर्म राख के बादल और लावा प्रवाह की संभावित आशंका को लेकर भी चेतावनी जारी की है।
इंडोनेशिया में सेमेरू, मेरापी, लेवोटोबी लाकी-लाकी और सिनाबुंग समेत चार अन्य ज्वालामुखी भी फिलहाल अलर्ट लेवल-3 पर हैं।
फिलहाल सुनामी का तत्काल खतरा नहीं
अधिकारियों के मुताबिक, अनाक क्राकाटोआ के ताजा विस्फोट से फिलहाल सुनामी का कोई तत्काल खतरा नहीं है। हालांकि, ज्वालामुखी की गतिविधियों और आसपास के इलाकों में स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
अनाक क्राकाटोआ उसी क्षेत्र में 1883 के विनाशकारी क्राकाटोआ विस्फोट के बाद समुद्र से उभरकर बना था। वर्ष 1883 में हुए उस भीषण विस्फोट के बाद कई सुनामी आई थीं, जिनमें 36,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
इसके बाद दिसंबर 2018 में अनाक क्राकाटोआ के विस्फोट के दौरान ज्वालामुखी का एक हिस्सा ढह गया था। इसके कारण आई सुनामी ने जावा और सुमात्रा के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई थी और 400 से अधिक लोगों की जान गई थी।







