
नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब पीजी के तौर पर इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला बिल्डिंग अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका है। वहीं 12 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। हादसे के बाद NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और अन्य राहत दल रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं। मलबा हटाने और फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान लगातार जारी है।
यह बिल्डिंग दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास सत्य निकेतन इलाके में स्थित थी और इसमें बड़ी संख्या में छात्र पीजी के तौर पर रह रहे थे। बताया जा रहा है कि बिल्डिंग में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे अचानक पूरी इमारत भरभराकर नीचे आ गिरी। देखते ही देखते मौके पर मलबे का ढेर लग गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बिल्डिंग गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोगों को शुरुआत में लगा कि कहीं कोई बड़ा धमाका हुआ है। कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका धूल के घने गुबार से भर गया। लोग घबराकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे और देखते ही देखते घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई।
बिल्डिंग के मलबे में लोगों के दबे होने की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा। देर रात तक मलबा हटाने का काम जारी रहा। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और छात्र भी घटनास्थल पर जुटे रहे। कई स्थानीय लोगों ने बचाव टीमों के साथ मिलकर मलबा हटाने में मदद की, जबकि कुछ छात्र अपने दोस्तों और साथियों की जानकारी लेने के लिए मौके पर डटे रहे।
मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए NDRF की टीमें विशेष तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल कर रही हैं। लाइफ डिटेक्टर, प्रशिक्षित सर्च डॉग्स और कटिंग मशीनों की मदद से मलबे के नीचे जीवन के संकेत तलाशे जा रहे हैं। रेस्क्यू टीमों की कोशिश है कि मलबे को सावधानीपूर्वक हटाया जाए, ताकि अगर कोई व्यक्ति जीवित अवस्था में फंसा हो तो उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
हादसे पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ा एक्शन लिया है। इस मामले में MCD के डिप्टी कमिश्नर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर,अस्सिटेंट इंजीनियर, जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया है।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार ने इमारत गिरने की वजह और इसके लिए जिम्मेदार लोगों का पता लगाने के लिए विशेष जांच समिति गठित की है। समिति हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। इसमें इमारत की स्थिति, चल रहे मरम्मत कार्य, सुरक्षा मानकों और संभावित लापरवाही जैसे बिंदुओं की जांच की जाएगी। जांच के बाद समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की दिशा तय होगी।
मामले में पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम बंसल के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी है और संभावित ठिकानों पर दबिश देने के लिए दस टीमें लगाई गई हैं। पुलिस हरिराम को पकड़ने के लिए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में छापेमारी कर रही है।
इस बीच हादसे का मामला दिल्ली हाईकोर्ट भी पहुंच गया है। एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की। पीठ ने अनुरोध स्वीकार करते हुए जनहित याचिका को उसी दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अनुमति दे दी।






