
मालदा: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में गंगा नदी के तेज कटाव ने एक बार फिर तबाही का मंजर दिखाया है। रतुआ-1 ब्लॉक के मुलिरामटोला इलाके में स्थित करीब 150 साल पुराना शिव मंदिर सोमवार, 7 सितंबर को गंगा की तेज धारा और लगातार हो रहे कटाव की चपेट में आकर नदी में समा गया। मंदिर के नदी में विलीन होने की घटना से स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश और मायूसी है।
यह प्राचीन मंदिर महानंदटोला ग्राम पंचायत के अंतर्गत मुलिरामटोला में स्थित था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से गंगा का कटाव लगातार बढ़ रहा था और मंदिर भी नदी के बेहद करीब पहुंच गया था। खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने मंदिर को बचाने के लिए रेत से भरी बोरियां और दूसरे स्थानीय इंतजाम किए, लेकिन नदी की तेज धार के सामने उनकी कोशिशें नाकाम साबित हुईं।
कटाव ने बढ़ाई ग्रामीणों की चिंता
गंगा के लगातार कटाव ने सिर्फ मंदिर को ही नुकसान नहीं पहुंचाया है, बल्कि इलाके में बड़ी संख्या में लोग भी प्रभावित हुए हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार, 100 से अधिक घर और कृषि योग्य जमीन पहले ही नदी की धारा में समा चुके हैं। इससे लोगों के सामने घर और रोजी-रोटी दोनों बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी का कटाव लगातार इलाके की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में और भी घरों तथा जमीनों को नुकसान पहुंच सकता है।
आंखों के सामने इतिहास का अंत
करीब डेढ़ सदी पुराने मंदिर के गंगा में समा जाने से स्थानीय लोगों की भावनाएं भी आहत हुई हैं। मंदिर लंबे समय से इलाके की धार्मिक और सामाजिक पहचान का हिस्सा रहा था। ग्रामीणों ने इसे बचाने की कोशिश की, लेकिन नदी के तेज बहाव के आगे कोई उपाय काम नहीं आया।
गंगा के बढ़ते जलस्तर और कटाव ने मालदा के नदी किनारे बसे इलाकों में एक बार फिर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




