
नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत के भरभराकर गिरने के बाद कार्रवाई का दौर तेज हो गया है। हादसे में सात लोगों की मौत के बाद पुलिस ने इमारत से जुड़े परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और 52 वर्षीय बेटा महेश गुप्ता शामिल हैं।
अदालत ने हरिराम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं, महेश गुप्ता से पूछताछ के लिए उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
मरम्मत के दौरान ढह गई थी पूरी इमारत
घटना रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे की है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित PG भवन में मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक पूरी इमारत का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल और बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए 27 घंटे से ज्यादा समय तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। सोमवार शाम करीब 5:10 बजे बचाव अभियान खत्म किया गया।
सात जिंदगियां खत्म, पांच लोग घायल
इस हादसे में कुल सात लोगों की मौत हुई है। मृतकों में कम उम्र के कई छात्र भी शामिल हैं। इसके अलावा 75 वर्षीय मजदूर सुरिंदर सिंह की भी जान चली गई। पांच अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज कराया जा रहा है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई थी।
परिवार के तीन लोगों पर पुलिस की नजर
जांच में सामने आया कि संपत्ति उर्मिला गुप्ता के नाम दर्ज थी, जबकि भवन का बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता के नाम पर था। हरिराम गुप्ता वायुसेना से सेवानिवृत्त बताए गए हैं। पुलिस ने उन्हें राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया।
पुलिस के मुताबिक, PG से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी उनके बेटे महेश गुप्ता के पास थी। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि मरम्मत का काम किसके निर्देश पर कराया जा रहा था और सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं।
पुलिस मजदूरों, ठेकेदार और मरम्मत कार्य से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
सिर्फ मालिक ही नहीं, MCD भी जांच के घेरे में
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने भी अपने अधिकारियों पर कार्रवाई की है। दक्षिण जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इनमें उपायुक्त राकेश कुमार, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह और भवन विभाग के तीन इंजीनियर शामिल हैं।
इस कार्रवाई के बाद अब सवाल उठ रहा है कि इमारत में कथित अवैध निर्माण और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की निगरानी में लापरवाही तो नहीं हुई।
हाईकोर्ट ने भी लिया मामले का संज्ञान
सत्य निकेतन हादसा अब अदालत की निगरानी के दायरे में भी आ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में हाई लेवल MCD जांच के आदेश दिए हैं। भवनों की सुरक्षा और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
दिल्ली के PG इलाकों में शुरू होगी जांच
हादसे के बाद सरकार ने राजधानी के PG इलाकों में मौजूद इमारतों की सुरक्षा को लेकर सख्ती के संकेत दिए हैं। अवैध पांचवीं मंजिल वाली इमारतों पर कार्रवाई और खतरनाक भवनों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं।
LG की ओर से PG इलाकों में विशेष जांच अभियान चलाने और एक सप्ताह के भीतर स्ट्रक्चरल ऑडिट पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
छात्रों के लिए सुरक्षित PG सबसे बड़ी चिंता
सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में छात्र PG में रहते हैं। हादसे के बाद छात्र संगठनों ने सुरक्षित और सस्ता आवास उपलब्ध कराने, दोषियों पर कार्रवाई करने और पर्याप्त हॉस्टल की व्यवस्था की मांग उठाई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस इमारत को छात्र अपना घर समझकर किराए पर लेते हैं, उसकी मजबूती और सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली के PG और छात्र आवासों की पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




