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सरायकेला-खरसावां: जिले के विभिन्न प्रखंडों में मनरेगा के संविदा कनीय अभियंताओं से 15वें वित्त आयोग की योजनाओं का काम कराए जाने की शिकायत के बाद प्रशासन ने केंद्र सरकार को अनुपालन प्रतिवेदन भेजा है। यह शिकायत झारखंड के आरटीआई एक्टिविस्ट कृतिवास मंडल ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के समक्ष की थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सरायकेला-खरसावां जिले के विभिन्न प्रखंडों में मनरेगा के तहत संचालित योजनाओं के लिए संविदा पर नियुक्त कनीय अभियंताओं से उनके निर्धारित कार्य के अलावा 15वें वित्त आयोग की योजनाओं का काम भी कराया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने इसे ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार के 14 दिसंबर 2023 के विभागीय आदेश का उल्लंघन बताया था।
सभी प्रखंडों से रिपोर्ट लेने के बाद भेजा गया जवाब
शिकायत के बाद उप विकास आयुक्त-सह-अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक, सरायकेला-खरसावां ने जिले के सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों से इस संबंध में प्रतिवेदन मांगा। सरायकेला, कुचाई, खरसावां, राजनगर, गम्हरिया, चांडिल, नीमडीह, ईचागढ़ और कुकड़ू प्रखंडों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर अनुपालन प्रतिवेदन तैयार कर भारत सरकार के मनरेगा विभाग के अवर सचिव विवेकानंद को भेजा गया।
प्रशासन की ओर से भेजे गए प्रतिवेदन में कहा गया है कि वर्तमान में मनरेगा योजना में संविदा पर कार्यरत कनीय अभियंताओं से 15वें वित्त आयोग की योजनाओं का कार्य नहीं कराया जा रहा है। साथ ही ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार के 14 दिसंबर 2023 के आदेश का अनुपालन किए जाने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ता ने कार्रवाई की मांग उठाई
आरटीआई एक्टिविस्ट कृतिवास मंडल ने कहा कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में संविदा कर्मियों पर अतिरिक्त कार्य का बोझ डालने से योजनाओं की निगरानी और कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि विभागीय आदेश जारी होने के बावजूद यदि कहीं नियमों की अनदेखी हुई है तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
मंडल ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय से मांग की है कि जिन प्रखंड विकास पदाधिकारियों पर विभागीय आदेश के उल्लंघन के आरोप हैं, उनके मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में मनरेगा से जुड़े कार्य निर्धारित संविदा कनीय अभियंताओं के माध्यम से ही कराए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।




