
औरंगाबाद: बिहार के औरंगाबाद में झारखंड के पलामू जिला के रहने वाले एक युवक ने पुलिस को ही अपने झांसे में लेकर सनसनीखेज तरीके से वाहनों की जांच करा दी। आरोपी ने खुद को प्रशिक्षु IPS अधिकारी बताते हुए नगर थाना पुलिस को फोन किया और छापेमारी के लिए पुलिसकर्मियों की मांग की। अधिकारी होने का भरोसा दिलाए जाने के बाद पुलिस की गश्ती टीम उसके साथ निकल पड़ी।
मामले का खुलासा उस वक्त हुआ, जब आरोपी ने दो युवकों को अपनी स्कॉर्पियो में बैठाकर मदनपुर की ओर ले जाना शुरू किया। दोनों युवकों ने किसी तरह अपने रिश्तेदार से संपर्क किया। रिश्तेदार झारखंड पुलिस में दारोगा के पद पर तैनात हैं। उन्होंने कथित IPS अधिकारी से फोन पर बात कर अपना परिचय दिया। पुलिस अधिकारी से बातचीत होते ही आरोपी को अपनी पहचान उजागर होने का शक हो गया। इसके बाद वह दोनों युवकों को सड़क किनारे उतारकर स्कॉर्पियो से फरार हो गया।
सरकारी नंबर पर फोन कर मांगी पुलिस टीम
नगर थानाध्यक्ष बबन बैठा के अनुसार, फर्जी IPS ने नगर थाना के सरकारी मोबाइल नंबर पर फोन किया था। उस समय मोबाइल प्रभारी थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार के पास था। आरोपी ने खुद को प्रशिक्षु IPS अधिकारी बताते हुए छापेमारी के लिए पुलिस टीम मांगी। उसकी बातों पर विश्वास करते हुए नगर थाना की गश्ती टीम उसके साथ चली गई। इसके बाद NH-139 पर वाहनों की जांच शुरू कर दी गई। फर्जी आईपीएस ने पुलिस टीम के साथ एनएच-139 पर जसोइया मोड़ से सीमेंट फैक्ट्री तक वाहनों की जांच की। इस दौरान उसने एक सब्जी व्यापारी को रोककर पूछताछ की।
टेंपो रोककर तीन युवकों से पूछताछ
पुलिस टीम के साथ फर्जी IPS अनुग्रह नारायण रोड रेलवे स्टेशन की ओर गया। वहां शहर की तरफ आ रहे एक टेंपो को रोककर उसमें सवार तीन यात्रियों से पूछताछ की गई। उनकी पहचान पलामू जिले के हरिहरगंज थाना क्षेत्र के खड़कपुर निवासी आलोक कुमार, सुनील कुमार रवि और नबीनगर थाना क्षेत्र के गोसाइडीह निवासी अजय कुमार के रूप में हुई।
पूछताछ के बाद अजय कुमार को छोड़ दिया गया, जबकि आलोक और सुनील को फर्जी IPS अधिकारी अपनी स्कॉर्पियो में बैठाकर मदनपुर की ओर ले जाने लगा।
झारखंड पुलिस के दारोगा से बात होते ही खुला राज
अजय कुमार ने दोनों युवकों के परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद आलोक और सुनील के एक रिश्तेदार, जो झारखंड के भवनाथपुर थाना में दारोगा के पद पर कार्यरत हैं, ने दोनों से संपर्क किया। उन्होंने फर्जी IPS अधिकारी से भी फोन पर बात की और अपना परिचय दिया।
पुलिस अधिकारी से बातचीत के बाद आरोपी को शक हो गया कि उसकी पहचान सामने आ सकती है। इसके बाद उसने दोनों युवकों को कामा बिगहा जीटी रोड के पास उतार दिया और वहां से फरार हो गया।
दोनों युवकों ने पुलिस को बताया कि फर्जी IPS उन्हें मोबाइल से बात नहीं करने दे रहा था। उन्होंने डराने-धमकाने और मारपीट करने का भी आरोप लगाया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने नगर थाना के एक दारोगा को भी मोबाइल पर किसी से बात करने से रोकने की कोशिश की थी।
घटना की जानकारी मिलते ही औरंगाबाद ने जिले के सभी थानों को अलर्ट कर दिया और आरोपी की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि फर्जी IPS स्कॉर्पियो से पलामू की ओर भाग रहा है।
एरका चेकपोस्ट के पास पुलिस की चेकिंग देखकर आरोपी स्कॉर्पियो छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने मौके से वाहन चालक पिंटू कुमार और कुंदन कुमार को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान डाल्टेनगंज निवासी पिंटू कुमार और चैनपुर थाना क्षेत्र के शाहपुर मोहल्ला निवासी कुंदन कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो भी बरामद कर ली है।
स्कॉर्पियो मालिक की भी हो रही जांच
बरामद स्कॉर्पियो के नंबर की जांच में वाहन के मालिक के रूप में पटना के रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के जकरियापुर निवासी संजय कुमार मिश्रा का नाम सामने आया है। वाहन के रजिस्ट्रेशन में दर्ज मोबाइल नंबर पर पुलिस ने संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन बंद मिला।
औरंगाबाद एसपी ने बताया कि मुख्य आरोपी समेत इस पूरे मामले में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें झारखंड के अलग-अलग संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने खुद को IPS अधिकारी बताकर पुलिस टीम को अपने साथ क्यों लिया, दो युवकों को अपने कब्जे में लेने के पीछे उसकी मंशा क्या थी और इस पूरे घटनाक्रम में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल थे। स्कॉर्पियो के इस्तेमाल और कथित फर्जी IPS के नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।





