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नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ईपीएफओ की अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने को मंजूरी दे दी है, जो 17 सितंबर से लागू हो जाएगा। इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी EPFO कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।
सरकार के इस निर्णय से पात्र कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF), पेंशन और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा (EDLI) जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ मिलेगा। वेतन सीमा में यह बदलाव करीब 12 साल बाद किया गया है।
वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह किए जाने के बावजूद कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी पर इसका अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। कर्मचारी के वेतन से अलग से कोई अतिरिक्त कटौती नहीं की जाएगी। ईपीएफ में बढ़ने वाला योगदान नियोक्ता के मौजूदा 12 फीसदी योगदान के हिस्से से समायोजित किया जाएगा।
नियोक्ता के योगदान में से 8.33 फीसदी हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत पेंशन खाते में जाएगा, जबकि शेष योगदान कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा किया जाएगा। इस बदलाव से अधिक कर्मचारियों को ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाने में मदद मिलेगी। साथ ही, पात्र कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद नियमित पेंशन आय का लाभ मिल सकेगा।
ईपीएफओ की वेतन सीमा वर्ष 2004 से 2014 तक 15,000 रुपये से कम स्तर पर रही थी। इसके बाद सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। अब सरकार ने इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का निर्णय लिया है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि नई व्यवस्था से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आने की उम्मीद है। इससे देश में सामाजिक सुरक्षा का कवरेज और व्यापक होगा।
सरकार के मुताबिक, पिछले वर्षों में कर्मचारियों के वेतन में लगातार बढ़ोतरी हुई है। आय में वृद्धि और संगठित क्षेत्र में रोजगार के विस्तार को ध्यान में रखते हुए ईपीएफओ की वेतन सीमा बढ़ाने का फैसला किया गया है।
इस कदम से ऐसे कर्मचारियों को भी अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाने का रास्ता खुलेगा, जिनका वेतन मौजूदा 15,000 रुपये की सीमा से अधिक है, लेकिन नई 25,000 रुपये की सीमा के भीतर आता है।
वेतन सीमा बढ़ाने के फैसले से सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी पड़ेगा। अनुमान के मुताबिक, इस बदलाव के कारण हर साल करीब 11,339 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। वहीं, वर्तमान में ईपीएफओ के लिए सालाना बजटीय सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है।
सरकार के अनुमान के अनुसार, अगले पांच वर्षों में कुल खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये रहने की संभावना है।







