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जगदलपुर: झीरम घाटी नरसंहार के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने बुधवार को 10 माओवादियों को मौत की सजा सुनाई है। जगदलपुर स्थित विशेष NIA अदालत ने सभी आरोपियों को आपराधिक साजिश और हत्या के मामले में दोषी ठहराया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-B और 302 समेत गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की संबंधित धाराओं के तहत यह सजा सुनाई।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मृत्युदंड की सजा का निष्पादन तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट यह तय नहीं कर देता कि अभियुक्तों को दी गई सजा उचित है। फिलहाल सभी दोषी जेल में ही रहेंगे। अदालत ने उन्हें फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने के लिए 30 दिनों की समय-सीमा भी दी है।
25 मई 2013 को हुए झीरम घाटी हमले में प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के सशस्त्र कैडरों ने कांग्रेस की परिवर्तन रैली के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 38 लोग घायल हुए थे। इस हमले में राज्य कांग्रेस का लगभग पूरा शीर्ष नेतृत्व खत्म हो गया था।
इन 10 माओवादियों को सुनाई गई मौत की सजा
NIA के विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने जिन 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई, उनमें प्रमिला मोडियाम, चैतु लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमिता उर्फ पुनेम मोडियाम, मुक्का मंडवी, कोसा कवासी उर्फ कोसराम, आयता मरकाम, मड़कम देव, जोगा मड़कम, बंजामी सन्ना उर्फ चमरा और महादेव नाग शामिल हैं।
मामले में 11वां आरोपी सुनवाई के दौरान ही दम तोड़ चुका है। वहीं, चार्जशीट में नामजद 28 अन्य आरोपी अब भी फरार बताए गए हैं।
25 मई 2013 को दहला था झीरम घाटी
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को बस्तर और सुकमा जिलों की अंतर-जिला सीमा के पास हुआ था। उस समय 150 से अधिक माओवादियों ने कांग्रेस की परिवर्तन रैली से लौट रहे काफिले को निशाना बनाया था।
हमले में कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और वरिष्ठ नेता व पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत 29 लोगों की हत्या कर दी गई थी। महेंद्र कर्मा सलवा जुडूम के गठन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले नेताओं में शामिल थे।
NIA की चार्जशीट के मुताबिक, माओवादियों ने महेंद्र कर्मा को विशेष रूप से निशाना बनाने की योजना बनाई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, हमले की साजिश CPI (माओवादी) के ‘टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन’ (TCOC) के तहत रची गई थी। वर्ष 2013 की शुरुआत में माओवादी कमांडरों की बैठकों में कथित तौर पर ‘वर्ग शत्रुओं’ को निशाना बनाने की योजना तैयार की गई थी।
पहले बारूदी सुरंग से उड़ाया वाहन, फिर काफिले पर हमला
जांच के मुताबिक, माओवादियों ने कांग्रेस काफिले में शामिल लाल रंग की बोलेरो के नीचे बारूदी सुरंग में विस्फोट किया था। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि सड़क पर करीब पांच फुट गहरा गड्ढा बन गया। इसके बाद एक खराब ट्रक खड़ा कर सड़क को अवरुद्ध कर दिया गया, जिससे काफिला आगे नहीं बढ़ सका।
काफिले में करीब 20 वाहन फंस गए। इसके बाद आसपास की पहाड़ियों से माओवादियों ने लगभग दो घंटे तक गोलीबारी और ग्रेनेड से हमला किया।
हमले में मारे गए 29 लोगों में 10 सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, हमले के बाद माओवादी मौके से हथियार और अन्य सामान भी ले गए थे। इनमें 9 एमएम पिस्तौल की दो मैगजीन और 20 कारतूस, दो AK-47 राइफलें, 14 मैगजीन और 455 कारतूस, 10 हैंड ग्रेनेड और संचार उपकरण शामिल थे।
NIA ने दो दिन बाद संभाली जांच
हमले के दो दिन बाद NIA ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी। जांच के बाद 25 सितंबर 2014 को गिरफ्तार किए गए नौ आरोपियों के खिलाफ जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई।
इसके बाद 28 सितंबर 2015 को NIA ने 30 अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की। मामले में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। चार्जशीट में नामजद 28 अन्य आरोपी अब भी फरार बताए गए हैं।
कई बड़े माओवादी नेता भी रहे आरोपी
मामले की चार्जशीट में CPI (माओवादी) के कई प्रमुख नेताओं के नाम भी शामिल रहे हैं। इनमें पोलित ब्यूरो सदस्य तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवुजी का नाम शामिल है, जिसने इस साल फरवरी में तेलंगाना में आत्मसमर्पण किया था।
इसके अलावा बारसे देवा भी आरोपी है। उसने माड़वी हिडमा के बाद PLGA बटालियन-1 के कमांडर की जिम्मेदारी संभाली थी और इस साल जनवरी में आत्मसमर्पण किया था।
CPI (माओवादी) केंद्रीय समिति का सदस्य गणेश उइके भी इस मामले में आरोपी था। उसकी दिसंबर 2025 में ओडिशा में एक मुठभेड़ में मौत हो गई थी।
एक दशक से ज्यादा चली सुनवाई
झीरम घाटी मामले की सुनवाई एक दशक से अधिक समय तक चली। इस दौरान अदालत में कम से कम 294 सुनवाई हुईं। इस महीने अंतिम बहस पूरी होने के बाद NIA की विशेष अदालत ने 5 सितंबर को आरोपियों को दोषी ठहराया था।
इसके बाद बुधवार को अदालत ने दोषियों की सजा तय करते हुए 10 माओवादियों को मौत की सजा सुनाई। करीब 13 साल पुराने इस मामले में अदालत का फैसला झीरम घाटी हमले की कानूनी प्रक्रिया में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।




