
नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम फैसला लिया है। आयोग ने फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम और पार्टी के आरक्षित ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। यह व्यवस्था आगामी विधानसभा उपचुनावों तक प्रभावी रहेगी, जब तक आयोग विवाद पर अंतिम फैसला नहीं करता।
आयोग के इस आदेश का सीधा असर नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव पर पड़ेगा। दोनों सीटों पर तृणमूल के प्रतिद्वंद्वी गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने की व्यवस्था की है।
दोनों गुटों से मांगे तीन-तीन विकल्प
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपने लिए तीन वैकल्पिक नाम और तीन स्वतंत्र चुनाव चिन्ह प्राथमिकता के क्रम में सुझाएं। आयोग इनमें से किसी एक नाम को मंजूरी देगा और मौजूदा चुनावों के लिए उपलब्ध स्वतंत्र चिन्हों की सूची में से अलग-अलग प्रतीक आवंटित किए जाएंगे। इसके लिए दोनों पक्षों को 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक अपने विकल्प देने को कहा गया था।
अंतिम फैसला अभी बाकी
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह स्थायी फैसला नहीं है। तृणमूल कांग्रेस के संगठन और पार्टी पर अधिकार को लेकर दोनों पक्षों के दावों पर चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत विस्तृत सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। आयोग के मुताबिक उपचुनाव की समय-सीमा को देखते हुए फिलहाल अंतरिम व्यवस्था करना जरूरी था, ताकि दोनों गुटों को समान अवसर मिल सके।
फैसले पर आमने-सामने दोनों पक्ष
आयोग के आदेश के बाद दोनों गुटों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। ममता बनर्जी के समर्थक खेमे ने अंतरिम आदेश पर कानूनी आपत्ति जताते हुए इसे नियमों के अनुरूप नहीं बताया है। दूसरी ओर, विरोधी गुट ने आयोग के फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि वह अंतरिम व्यवस्था का पालन करेगा।
इस फैसले के बाद फिलहाल दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनाव में अपने पारंपरिक तृणमूल नाम और फूल-घास चिन्ह के बजाय आयोग द्वारा मंजूर किए जाने वाले नए नाम और चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरना होगा।







