
रांची। बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को अदालत ने उनकी ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद रांची स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में चल रही मामले की सुनवाई आगे जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है।
विशेष अदालत के आदेश को हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
दरअसल, बड़गाईं जमीन मामले में हेमंत सोरेन की ओर से रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में डिस्चार्ज पिटीशन दाखिल की गई थी। इसके जरिए उन्होंने खुद को इस मामले की आपराधिक कार्यवाही से बाहर किए जाने की मांग की थी।
बताया गया है कि यह याचिका 5 दिसंबर 2025 को दाखिल की गई थी। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में यह दलील रखी गई थी कि हेमंत सोरेन के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
हालांकि, विशेष पीएमएलए अदालत ने 8 जून 2026 को उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी। निचली अदालत के इस आदेश के बाद हेमंत सोरेन की ओर से झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया गया।
16 सितंबर को पूरी हुई थी सुनवाई
हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन की ओर से निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप की मांग की गई थी। 9 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से जवाब मांगा था और जवाब दाखिल करने के लिए 16 सितंबर तक का समय दिया था।
इसके बाद 16 सितंबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को अदालत ने अपना निर्णय सुनाते हुए हेमंत सोरेन की याचिका खारिज कर दी।
8.86 एकड़ जमीन को लेकर क्या है विवाद?
यह पूरा मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में जमीन के रिकॉर्ड, दस्तावेजों और कथित लेन-देन समेत विभिन्न पहलुओं की जांच कर रहा है।
ED की जांच में जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं को भी शामिल किया गया है। इसी जांच के आधार पर हेमंत सोरेन को भी मामले में आरोपी बनाया गया है।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। हाई कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हेमंत सोरेन दोषी करार दिए गए हैं। मामले में दोष या निर्दोषता का अंतिम फैसला ट्रायल के बाद ही होगा।
अब विशेष पीएमएलए कोर्ट में आगे बढ़ेगी कार्रवाई
हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब रांची की विशेष पीएमएलए अदालत में मामले की आगे की कार्यवाही जारी रह सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, 19 सितंबर को विशेष अदालत में सुनवाई प्रस्तावित है, जहां आरोप गठन की प्रक्रिया से संबंधित कार्यवाही आगे बढ़ सकती है।
आरोप गठन की प्रक्रिया में अदालत यह देखती है कि अभियोजन की ओर से पेश सामग्री के आधार पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद है या नहीं। यह चरण दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होता।
मामले में कई अन्य आरोपी भी
ED की जांच के दायरे में हेमंत सोरेन के अलावा कई अन्य लोग भी शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।
मामले में जिन नामों का उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है, उनमें राजस्व कर्मी भानु प्रसाद प्रताप, अंतू तिर्की, बिजेंद्र सिंह, बिपिन सिंह, प्रियरंजन सहाय, मनोज कुमार यादव, कुमार राजश्री, राजकुमार पाहन, संजीत कुमार, आर्किटेक्ट विनोद कुमार सिंह, शेखर कुशवाहा, तापस घोष, इरशाद अख्तर, अफसर अली और सद्दाम हुसैन समेत अन्य लोग शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 15 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठन पहले ही किया जा चुका है, जबकि कुछ आरोपियों के मामले में प्रक्रिया अलग-अलग चरण में है।
क्या है पूरे घटनाक्रम का सार?
8.86 एकड़ जमीन का मामला → ED की जांच → हेमंत सोरेन को आरोपी बनाया गया → 5 दिसंबर 2025 को डिस्चार्ज पिटीशन → 8 जून 2026 को विशेष पीएमएलए कोर्ट ने याचिका खारिज की → हाई कोर्ट में चुनौती → 16 सितंबर को सुनवाई पूरी → 18 सितंबर को हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की → अब विशेष पीएमएलए कोर्ट में आगे की कार्रवाई।
फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले से हेमंत सोरेन को इस मामले में डिस्चार्ज नहीं मिला है और विशेष पीएमएलए अदालत में चल रही न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।




