चंदा जुटाया,ट्रैक्टर से मोरम मंगाया और कुदाल लेकर सड़क पर उतर गए ग्रामीण
आकाश लोहार
गढ़वा
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से उम्मीद होती है कि गांव की समस्याएं उनके दरवाजे तक पहुंचने से पहले ही समाधान की राह पकड़ लें,लेकिन जब बार बार गुहार लगाने के बाद भी सड़क की बदहाली दूर नहीं हुई,तो पचपेड़ी गांव के ग्रामीणों ने इंतजार छोड़कर खुद ही बदलाव की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली,पांकी प्रखंड के माड़न पंचायत अंतर्गत पचपेड़ी गांव में इन दिनों ग्रामीणों की एकजुटता की तस्वीर देखने को मिल रही है,जर्जर सड़क की मरम्मत के लिए ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाया,ट्रैक्टर से मोरम मंगवाया और फिर खुद कुदाल लेकर सड़क पर उतर गए,कोई मोरम फैला रहा है तो कोई सड़क को समतल करने में जुटा है,इस सामूहिक प्रयास ने यह संदेश दिया है कि जब गांव के लोग एकजुट हो जाएं तो मुश्किल रास्तों को भी आसान बनाया जा सकता है।
गुहार लगाते रहे ग्रामीण,नहीं हुई सुनवाई :- ग्रामीणों के अनुसार,गांव की सड़क लंबे समय से खराब है,बारिश के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो गई,सड़क पर जगह जगह गड्ढे बन गए और आवागमन में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है,ग्रामीणों ने सड़क की मरम्मत को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई,लेकिन जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों ने आपस में बैठक की,बैठक में तय किया गया कि किसी के भरोसे बैठे रहने के बजाय गांव के लोग खुद आगे आएंगे और अपनी सड़क की मरम्मत करेंगे।
चंदे से मोरम,श्रमदान से सड़क की तस्वीर बदलने की कोशिश :- ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाकर सड़क मरम्मत के लिए जरूरी सामग्री की व्यवस्था शुरू की,ट्रैक्टर से मोरम गिरवाया गया और इसके बाद ग्रामीणों ने खुद सड़क को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया,दर्जनाधिक ग्रामीण इस अभियान में जुटे हुए हैं,खास बात यह है कि ग्रामीणों ने केवल कुछ लोगों तक श्रमदान सीमित रखने के बजाय हर घर से लोगों को इस काम में शामिल करने का संकल्प लिया है,ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किसी एक व्यक्ति की जरूरत नहीं,बल्कि पूरे गांव की जरूरत है,इसलिए इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी भी पूरे गांव की है।
बारिश बनी सड़क की बदहाली की बड़ी वजह :- इस संबंध में माड़न पंचायत की मुखिया साजदा खातून ने बताया कि बारिश के कारण सड़क काफी खराब हो गई है,उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए जल्द ही सड़क मरम्मत का काम शुरू कराया जाएगा।
ग्रामीणों की पहल ने खींचा ध्यान :- पचपेड़ी गांव की यह तस्वीर सिर्फ एक सड़क की मरम्मत की कहानी नहीं है,बल्कि यह ग्रामीणों की एकजुटता,आत्मनिर्भरता और अपनी समस्या के समाधान के लिए आगे आने की मिसाल भी है,जहां एक ओर ग्रामीण सड़क की बदहाली से परेशान थे,वहीं दूसरी ओर उन्होंने शिकायतों और इंतजार से आगे बढ़कर श्रमदान का रास्ता चुना,कुदाल चलाते ग्रामीणों के हाथ शायद यह सवाल भी पूछ रहे हैं कि आखिर जिस सड़क के लिए उन्हें अपने स्तर पर चंदा जुटाना और श्रमदान करना पड़ रहा है,उस सड़क की जिम्मेदारी आखिर किसकी है,फिलहाल पचपेड़ी गांव के ग्रामीण अपने दम पर सड़क को चलने लायक बनाने में जुटे हैं,अब देखना यह है कि ग्रामीणों की इस पहल के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नजर इस सड़क पर कब पड़ती है और कब ग्रामीणों को स्थायी सड़क की सुविधा मिलती है।




