
पलामू: वाराणसी में टीएसपीसी सुप्रीमो बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) को बड़ा झटका लगा है। संगठन के अधिकांश बड़े कमांडरों के मारे जाने या गिरफ्तार होने के बीच अब पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव निवासी शशिकांत गंझू का नाम प्रमुख सक्रिय कमांडर के तौर पर सामने आ रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ब्रजेश गंझू के मारे जाने के बाद शशिकांत गंझू अघोषित रूप से संगठन का नेतृत्व कर रहा है।
झारखंड सरकार ने शशिकांत गंझू पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मामलों में भी वांटेड बताया जाता है। बृजेश की मौत के बाद झारखंड पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी उसकी गतिविधियों और नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं।
पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, शशिकांत का मुख्य प्रभाव क्षेत्र पलामू और चतरा रहा है। उसके खिलाफ झारखंड के पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और हजारीबाग के अलावा उत्तर प्रदेश में भी 50 से अधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
बताया जाता है कि शशिकांत वर्ष 2000 के दशक में माओवादी संगठन से जुड़ा था। बाद में बृजेश गंझू के संपर्क में आने के बाद उसने टीएसपीसी का दामन थामा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह अत्याधुनिक हथियार, खासकर AK-47, लेकर चलता रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, शशिकांत करीब 13 मुठभेड़ों में पुलिस के घेरे से बच निकलने में सफल रहा है। सितंबर 2025 में पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल में पुलिस और टीएसपीसी उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान शशिकांत के बच निकलने की बात सामने आई थी, जबकि मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। इससे पहले मई 2025 में भी मनातू थाना क्षेत्र में पुलिस और शशिकांत गंझू के दस्ते के बीच मुठभेड़ की रिपोर्ट सामने आई थी।
बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद टीएसपीसी के नेटवर्क और नेतृत्व को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है। अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती शशिकांत की गतिविधियों, उसके संभावित संपर्कों और संगठन के बचे कैडरों की जानकारी जुटाने की है। बृजेश की मौत के बाद टीएसपीसी के नेतृत्व में पैदा हुए खालीपन के बीच शशिकांत गंझू पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर बनी हुई है।





