
जमशेदपुर: लौहनगरी के ग्रामीण व उपनगरीय इलाकों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं की लचर स्थिति को लेकर अब स्थानीय समाज मुखर होने लगा है। पूर्वी सिंहभूम जिला परिषद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली मुखी समाज की बस्तियों में फैली अव्यवस्था और जनसमस्याओं को लेकर ‘मुखी समाज विकास समिति’ का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल एक्शन मोड में नजर आया। समिति के जिला कार्यकारी अध्यक्ष कमलेश मुखी के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने जिला परिषद उपाध्यक्ष पंकज सिन्हा से मुलाकात कर बस्तियों की जमीनी हकीकत बयां की और 5 सूत्री मांग पत्र सौंपा।
गंदगी, मच्छर और अंधेरे का दंश झेलने को मजबूर बस्तियां
प्रतिनिधिमंडल ने उपाध्यक्ष के समक्ष बस्तियों की दुर्दशा का खाका खींचते हुए दो टूक कहा कि विकास के तमाम दावों के बावजूद मुखी समाज की बस्तियां आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही हैं। ज्ञापन के जरिए प्रशासन से तत्काल इन अहम बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की गई:
- फॉगिंग व ब्लीचिंग का छिड़काव: मौसमी बीमारियों और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से निजात दिलाने के लिए नियमित फॉगिंग और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव सुनिश्चित हो।
- सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग: बस्तियों से कचरे का त्वरित उठाव, नियमित झाड़ू और जाम नालियों की समुचित सफाई कराई जाए।
- शौचालय निर्माण: स्वच्छता मिशन को धरातल पर उतारने के लिए जरूरतमंद इलाकों में सार्वजनिक व निजी शौचालयों का अविलंब निर्माण हो।
- पेयजल संकट से मुक्ति: पीने के पानी की गंभीर किल्लत को देखते हुए जल मीनार (पानी टंकी) की स्थापना की जाए।
- अंधेरे से निजात: बस्तियों की मुख्य सड़कों और चौराहों पर सुरक्षा के मद्देनजर सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएं।
उपाध्यक्ष ने दिया त्वरित कार्रवाई का भरोसा
शिकायतों और मांगों को गंभीरता से सुनने के बाद जिला परिषद उपाध्यक्ष पंकज सिन्हा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि बस्तियों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों के पदाधिकारियों से सीधा समन्वय स्थापित कर इन जनसमस्याओं के त्वरित और समयबद्ध निष्पादन का भरोसा दिलाया।
प्रतिनिधिमंडल में ये प्रमुख चेहरे रहे शामिल
इस दौरान मुख्य रूप से मुखी समाज विकास समिति के जिला कार्यकारी अध्यक्ष कमलेश मुखी के अलावा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष विकास मुखी, जिला उपाध्यक्ष राजेश प्रसाद मुखी, जिला सचिव दशरथ करवा और रवि करूवा उपस्थित थे। सभी पदाधिकारियों ने साफ किया कि यदि जल्द ही धरातल पर काम नहीं दिखा, तो समाज अपने अधिकारों के लिए आगे की रणनीति तय करेगा।




