
रांची:झारखंड से दक्षिण-पश्चिम मानसून की रवानगी के आधिकारिक ऐलान के बाद भी कुदरत के मिजाज में नरमी के संकेत नहीं हैं। विदाई की औपचारिकता पूरी होने के बावजूद सूबे के ऊपर बादलों का डेरा बना हुआ है, जिसके चलते 9 अक्टूबर को राज्य के कई इलाकों में मौसम फिर से करवट लेने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने शुक्रवार को गरज-चमक के साथ बारिश और आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने की आशंका जताते हुए आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है।
मध्य और दक्षिणी जिलों पर ज्यादा असर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, स्थानीय मौसमी तंत्र (Local Weather System) एक्टिव होने की वजह से राजधानी रांची सहित राज्य के दक्षिणी और मध्यवर्ती जिलों में इसका सबसे ज्यादा प्रभाव दिखेगा। शुक्रवार को आसमान में घने बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और दोपहर या शाम के वक्त रुक-रुक कर हल्की से मध्यम दर्जे की बौछारें पड़ने के आसार हैं। बादलों के साए और बारिश की नमी के कारण दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से थोड़ा नीचे खिसक सकता है, जिससे उमस से तो राहत मिलेगी लेकिन मौसम अचानक बिगड़ने का खतरा बना रहेगा।
वज्रपात की चेतावनी, संभलकर रहने की हिदायत
मौसम विभाग ने विशेष रूप से आकाशीय बिजली को लेकर लोगों को सतर्क किया है। गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े न रहने की सख्त हिदायत दी गई है। किसानों और राहगीरों से अपील की गई है कि तेज गर्जन शुरू होते ही किसी पक्के और सुरक्षित ठिकाने की शरण लें।
10 अक्टूबर से राहत के आसार
राहत की बात यह है कि बादलों की यह आंखमिचौली ज्यादा दिन नहीं खिंचेगी। विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 10 अक्टूबर से सूबे में मौसम तेजी से शुष्क और साफ होने लगेगा। बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय गिरावट आएगी, हालांकि स्थानीय कारकों से कुछ जगहों पर छिटपुट बदलाव दिख सकते हैं। फिलहाल मौसम विभाग ने लोगों को अगले 24 से 48 घंटों तक आधिकारिक अपडेट्स पर नजर बनाए रखने का सुझाव दिया है।



