
जम्मू कश्मीर: सरहद पार से जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने का एक और खतरनाक मंसूबा भारतीय सेना के अभेद्य सुरक्षा चक्र के सामने हवा हो गया। पुंछ जिले के कृष्णा घाटी (KG) सेक्टर में सोमवार दोपहर घुसपैठ की फिराक में आगे बढ़ रहा लश्कर-ए-तैयबा का दस्ता खुद अपने ही बुने जाल जैसी तबाही का शिकार हो गया। नियंत्रण रेखा (LoC) के अग्रिम रक्षा घेरे में मौजूद बारूदी सुरंगों (लैंडमाइंस) से टकराते ही जोरदार धमाका हुआ, जिसमें लश्कर के एक टॉप कमांडर सहित चार आतंकियों के चीथड़े उड़ गए।
नंगी टेकरी का दुर्गम इलाका और बारूदी जाल
सूत्रों के अनुसार, यह पूरी घटना दोपहर बाद नंगी टेकरी इलाके की है। भारी हथियारों से लैस घुसपैठियों की एक टोली भारतीय सीमा में दाखिल होने के लिए घने और संवेदनशील रास्तों से आगे बढ़ रही थी। नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ विरोधी तंत्र (Anti-Infiltration Obstacle System) के तहत बिछाई गई बारूदी सुरंगों के क्षेत्र में जैसे ही आतंकियों के कदम पड़े, एक के बाद एक भीषण धमाके हुए।
धमाके की गूंज इतनी तीव्र थी कि सीमा पार से दाखिल होने की कोशिश कर रहे सभी चारों आतंकी मौके पर ही ढेर हो गए। प्राथमिक खुफिया इनपुट्स के मुताबिक, मारे गए आतंकियों में लश्कर-ए-तैयबा का एक कुख्यात कमांडर भी शामिल है, जो इस घुसपैठ दस्ते की अगुवाई कर रहा था।
आधिकारिक पुष्टि और तलाशी अभियान का इंतजार
हालांकि इलाके की संवेदनशीलता और सुरक्षा प्रोटोकॉल को देखते हुए सेना व सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से मारे गए आतंकियों के शवों की बरामदगी और उनकी पहचान को लेकर अंतिम आधिकारिक बयान आना बाकी है। तकनीकी और फील्ड स्तर पर पुष्टि के प्रयास जारी हैं।
कृष्णा घाटी सेक्टर में अलर्ट मोड पर जवान
रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले कृष्णा घाटी सेक्टर में इस घटना के बाद सरहद पर चौकसी और कड़ी कर दी गई है। एलओसी की फॉरवर्ड पोस्टों पर तैनात जवानों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि खराब मौसम या भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठाकर सीमा पार से किसी अन्य नापाक कोशिश को तुरंत नाकाम किया जा सके। इलाके में इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और ड्रोन से भी निगरानी तेज कर दी गई है।




