
जमशेदपुर:आदिवासी सेंगेल अभियान (ASA) ने आज एक गंभीर प्रेस बयान जारी कर कहा है कि जमशेदपुर के करनडीह स्थित पवित्र दिशोम जाहेर थान को कुछ लोगों ने सामाजिक बहिष्कार और प्रताड़ना का रणनीति केंद्र बना दिया है।
1. जाहेर थान का हो रहा दुरुपयोग:
सेंगेल दिशोम परगना सोनाराम सोरेन ने बताया कि माझी परगना महाल के तालसा माझी दुर्गा चरण मुर्मू, तोरोफ परगना दासमात हांसदा, देश परगना बैजु मुर्मू, कृष्णा हांसदा जैसे लोगों की चंडाल चौकड़ी ने इस पवित्र जाहेर थान को अपना अड्डा बनाया है। यहाँ से विशेष राजनीतिक पार्टी JMM के इशारे पर लोगों का सामाजिक बहिष्कार कर, उनका हुक्का-पानी बंद कर प्रताड़ित किया जाता है।
2. पूर्व सांसद सालखन मुर्मू का बहिष्कार और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को रोकना:
दिनांक 6 दिसंबर 2015 को इसी जाहेर थान से ईर्ष्या, द्वेष और बदले की भावना से उपरोक्त गिरोह ने पूर्व सांसद श्री सालखन मुर्मू को नीचा दिखाने, बदनाम करने और उनका राजनीतिक करियर खत्म करने के लिए उनका सामाजिक बहिष्कार किया। इतना ही नहीं, 22 दिसंबर 2015 को जयपाल मैदान, करनडीह में आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन ‘हासा-भाषा जीतकार महोत्सव’ (तीन दिवसीय कार्यक्रम) को बाधित किया गया और कार्यक्रम की मुख्य अतिथि झारखंड की तत्कालीन पूर्व राज्यपाल और वर्तमान देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को भी कार्यक्रम में आने से रांची जाकर रोका गया। यह लोकतंत्र और आदिवासी अस्मिता पर हमला था।
3. ईर्ष्या से ग्रसित पुराने घाघों का जमावड़ा:
इस जाहेर थान में ईर्ष्या-द्वेष से पीड़ित छुपे हुए अनेक पुराने घाघ बैठते हैं, जो सालखन मुर्मू की ऐतिहासिक उपलब्धियों – जैसे संथाली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कराना, सरना धर्म कोड की लड़ाई – से जलते हैं। वे अपनी विरासत की नफरत और मक्कारी को अपने वारिसों को सौंप जाना चाहते हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
4. ASA की अपील – सुधरने का अभी भी वक्त है:
आदिवासी सेंगेल अभियान आग्रह करता है कि अभी भी वक्त है, ईर्ष्या-द्वेष छोड़कर आदिवासी संताल समाज के हित में सुधर जाएं। ASA का यह भी आग्रह है कि ईर्ष्या-द्वेष की इस कैंसर जैसी बीमारी को मरने से पहले अपनी नई पीढ़ी को सौंप कर न जाएं। ASA आदिवासी संताल समाज के हित में सबके साथ मिल-जुलकर काम करने को तैयार है।
5. सालखन मुर्मू से बड़ा आदिवासी नेता कोई नहीं:
आज की तारीख में सालखन मुर्मू से ज्यादा कोई भी आदिवासी नेता आदिवासियों के सामाजिक, राजनीतिक, भाषा, धर्म और रोजगार के मुद्दे पर जमीनी लड़ाई नहीं लड़ा है। इसलिए एक साजिश के तहत उन्हें बदनाम करना पूरे आदिवासी समाज को कमजोर करना है।
मांग:
आदिवासी सेंगेल अभियान जिला प्रशासन से मांग करता है कि:
1. दिशोम जाहेर थान करनडीह को राजनीतिक और बहिष्कार के अड्डे के रूप में इस्तेमाल करने वालों पर रोक लगाई जाए।
2. 2015 में हुए गैरकानूनी सामाजिक बहिष्कार और महामहिम राष्ट्रपति के कार्यक्रम में बाधा डालने की उच्च स्तरीय जांच हो।
3. जाहेर थान जैसे पवित्र स्थलों को सभी दलों की राजनीति से मुक्त रखा जाए।




