
कोलकाता: भूटान के ताकत्सेमाखांग स्थित शिंताफू तशो में गुरुवार देर रात अचानक एक हिमनद (ग्लेशियर) झील के फटने से भयंकर तबाही की स्थिति बन गई है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते भारत के पूर्वोत्तर राज्यों—पश्चिम बंगाल और असम—में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। झील का जलस्तर तेजी से निचले इलाकों की ओर बढ़ रहा है, जिसे देखते हुए नदी किनारे बसे लोगों को तत्काल सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया जा रहा है। खतरे को भांपते हुए स्थानीय प्रशासन लाउडस्पीकर और माइक के जरिए लगातार चेतावनी जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील कर रहा है।
संकोश और गदाधर नदी के किनारे बसे इलाकों पर सबसे ज्यादा संकट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाढ़ का तेज बहाव पुनाखा जोंग से मात्र आठ किलोमीटर दूर कबेसा गेवोग के श्रीगंग इलाके तक पहुंच चुका है। यह पानी मोफू नदी के रास्ते होते हुए सीधे संकोश नदी की तरफ रुख कर रहा है।
उत्तर बंगाल और असम के सीमावर्ती इलाकों में इसी संकोश नदी को गदाधर नदी के नाम से जाना जाता है। नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ने की आशंका के चलते तटीय गांवों और बस्तियों में आपातकालीन निकासी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, शिंताफू झील भूटान की सबसे संवेदनशील और खतरनाक मानी जाने वाली 17 हिमनद झीलों में शामिल है।
उत्तर बंगाल और दार्जिलिंग में सतर्कता, प्रशासन ग्राउंड पर मुस्तैद
उत्तर बंगाल के निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिम भरी बन गई है। दार्जिलिंग की पहाड़ियों और तराई क्षेत्र के निवासियों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
उत्तर बंगाल विकास मंत्री निशीथ प्रमाणिक के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कूचबिहार जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। संकोश नदी के कछार में बसे सभी गांवों में माइकिंग कराई जा रही है ताकि कोई भी ग्रामीण नदी के करीब न जाए और सभी समय रहते ऊंचे व सुरक्षित स्थानों पर शरण ले सकें।



