
रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC के बाद अब राज्य सरकार द्वारा JSSC CGL और CDPO नियुक्ति रद्द करने वाले आदेश पर भी रोक लगा दी है। चार अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसके तहत परीक्षा और उससे जुड़ी चयन प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय लिया गया था।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 7 सितंबर तक का समय दिया गया है। वहीं, सरकार के जवाब पर याचिकाकर्ताओं को 14 सितंबर तक शपथपत्र दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर को होगी।
चयनित अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद JSSC CGL के जरिए चयनित 1,932 अभ्यर्थियों की नियुक्ति और नौकरी पर मंडरा रहा तत्काल संकट फिलहाल टल गया है। परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी हैं, जो चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अलग-अलग सरकारी विभागों में नियुक्त होकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सरकार के फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि यदि पूरी परीक्षा और चयन प्रक्रिया रद्द कर दी जाती है, तो पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों की नौकरी का क्या होगा। हाईकोर्ट के आदेश से फिलहाल इन अभ्यर्थियों को राहत मिली है और उनकी नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से संकट नहीं आएगा।
चयनित अभ्यर्थियों ने दी थी सरकार के फैसले को चुनौती
राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर JSSC CGL समेत कुछ परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार के इस निर्णय से प्रभावित JSSC CGL के चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया और परीक्षा रद्द करने के आदेश को चुनौती दी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में दलील दी गई कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर अनियमितता या गड़बड़ी हुई है, तो जांच के माध्यम से वास्तविक दोषियों की पहचान की जानी चाहिए। जिन लोगों की भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन पूरी परीक्षा और चयन प्रक्रिया को ही रद्द कर देना उन अभ्यर्थियों के साथ न्यायसंगत नहीं है, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया में शामिल होकर मेहनत से परीक्षा पास की है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि कथित गड़बड़ी में चयनित अभ्यर्थियों की कोई भूमिका नहीं थी। ऐसे में कुछ लोगों की अनियमितता का खामियाजा उन सभी अभ्यर्थियों को भुगतना उचित नहीं होगा, जिन्होंने नियमों के तहत परीक्षा दी और सफल होकर नियुक्ति हासिल की।
अभ्यर्थियों की ओर से अदालत के समक्ष यह पक्ष रखा गया कि जांच में यदि किसी अभ्यर्थी, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन बिना दोष तय किए पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करने से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होगा।
अंतिम फैसला अभी बाकी
हाईकोर्ट ने फिलहाल परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक लगाकर चयनित अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत दी है। हालांकि, यह मामले का अंतिम फैसला नहीं है। अदालत अब सरकार के जवाब और याचिकाकर्ताओं के जवाबी शपथपत्र के बाद मामले पर विस्तृत सुनवाई करेगी।





