July 26, 2026

पेपर लीक पर संशोधन विधेयक: दोषियों को 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये जुर्माना, पुराने कानून से अलग क्यों है नया कानून?

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पेपर लीक पर संशोधन बिल

पेपर लीक पर संशोधन बिल (ईटीवी भारत)

ईटीवी इंडिया वीडियो टीम

एक पेपर लीक लाखों लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर देता है. विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय कर देता है। 2024 और 2026 के NEET पेपर लीक कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. सड़क से लेकर संसद तक हंगामा मच गया. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ी कार्रवाई का ऐलान किया. कुछ ही घंटों बाद मोदी कैबिनेट ने एक ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी. यह बिल अगले हफ्ते संसद में पेश किया जा सकता है. ईटीवी भारत के आज के एक्सप्लेनर में हम बात करेंगे इस ऐतिहासिक बिल के बारे में, जो पेपर लीक माफिया को खत्म करने के लिए लाया जा रहा है.

पेपर लीक पर संशोधन विधेयक (ईटीवी भारत)

पेपर लीक और 2024 का कानून

ऐसा नहीं है कि अब से पहले पेपर लीक रोकने के लिए कोई कानून नहीं था. दरअसल, 2024 में भी पेपर लीक की कई बड़ी घटनाएं हुईं. NEET-UG परीक्षा 5 मई 2024 को आयोजित की गई थी और इसका पेपर झारखंड के हज़ारीबाग़ से लीक हो गया था। इसके बाद देशभर के छात्रों में गुस्सा फूट पड़ा. विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए. फिर केंद्र सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लेकर आई. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंजूरी दे दी और यह कानून 21 जून 2024 को लागू हुआ. कानून में पेपर लीक के अपराध को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-शमनीय बनाया गया. देश के युवाओं का भविष्य तय करने वाली यूपीएससी, एसएससी, रेलवे, बैंकिंग, नीट, जेईई जैसी हर बड़ी परीक्षा अब इस कानून के दायरे में आ गई है।

पेपर लीक पर संशोधन बिल

पेपर लीक पर संशोधन विधेयक (ईटीवी भारत)

सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024

यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक या नकल में शामिल पाया जाता है, तो उसे 3 से 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है, लेकिन अगर यह एक संगठित अपराध है यानी कोई गिरोह या माफिया व्यवस्थित रूप से पेपर लीक कर रहा है, तो सजा और भी कड़ी है। ऐसे लोगों को 5 से 10 साल की जेल और कम से कम 1 करोड़ रुपये का जुर्माना भुगतना होगा. और अगर कोई सेवा प्रदाता यानी परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी दोषी पाई जाती है तो उस पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा और 4 साल तक परीक्षा आयोजित करने से रोक दिया जाएगा. साथ ही परीक्षा खर्च भी उनसे वसूलने का प्रावधान किया गया।

पेपर लीक पर संशोधन बिल

पेपर लीक पर संशोधन विधेयक (ईटीवी भारत)

कानून में पेपर लीक की परिभाषा

उस कानून में प्रश्न पत्र या उत्तर पुस्तिका का लीक होना या अनधिकृत पहुंच, परीक्षा के दौरान अभ्यर्थी की मदद करना, कंप्यूटर नेटवर्क या संसाधनों के साथ छेड़छाड़ करना, मेरिट सूची या रैंक निर्धारित करते समय दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करना, फर्जी तरीके से परीक्षा आयोजित करना, फर्जी प्रवेश पत्र या ऑफर लेटर जारी करना अपराध माना गया था। इसके अलावा परीक्षा से जुड़ी गुप्त जानकारी साझा करना, परीक्षा हॉल में अनाधिकृत व्यक्ति का प्रवेश भी अपराध माना गया है.

पेपर लीक पर संशोधन बिल

पेपर लीक पर संशोधन विधेयक (ईटीवी भारत)

2024 के कानून में संशोधन

इस सख्त कानून के बावजूद 2026 में NEET UG पेपर फिर से लीक हो गया। इसे लेकर सड़क से लेकर संसद तक हंगामा हुआ और 24 जुलाई 2026 को मोदी कैबिनेट ने इस कानून को और भी सख्त बनाने के लिए एक नए ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी है। अब सवाल यह उठता है कि जब इतना सख्त कानून पहले से मौजूद था तो नए कानून की जरूरत क्यों पड़ी? इस सवाल का जवाब नये बिल के प्रावधानों में मौजूद है.

संशोधन विधेयक में सख्त सजा का प्रावधान

नए बिल में पेपर लीक के दोषी पाए जाने वालों को 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है. इतना ही नहीं, दोषियों को जल्द सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे, जो पेपर लीक मामलों की सुनवाई 3 महीने के भीतर पूरी कर लेंगे. इसका मतलब यह है कि अब पेपर लीक के मामले सालों में नहीं बल्कि महीनों में खत्म हो जाएंगे।

पीएम मोदी ने खुद गुरुवार आधी रात को एक वीडियो संदेश में इसकी घोषणा की थी और अगले ही दिन कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी. अब यह नया संशोधन अगले हफ्ते संसद में पेश किया जाएगा. संसद और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह बिल कानून बन जाएगा. नया कानून पेपर लीक को किस हद तक रोकेगा, यह तो वक्त ही बताएगा।

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