झारखंड वार्ता संवाददाता
गढ़वा: गढ़वा शहर के नहर चौक स्थित द न्यू सिटी हॉस्पिटल के संचालक पर गंभीर आरोप लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि इलाज के नाम पर पैसे नहीं देने पर नवजात बीमार बच्चे को 24 घंटे से अधिक समय तक अस्पताल में रोके रखा गया। इस घटना के बाद बुधवार को आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।
हंगामे के दौरान गढ़वा सदर अस्पताल में निजी अस्पतालों के दलालों की सक्रियता पर भी सवाल उठे। परिजनों ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल परिसर में ही मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में ले जाया जा रहा है।
खरौंधी प्रखंड अंतर्गत चौरिया गांव निवासी रीना देवी, उनके पति बहादुर चौधरी, रिश्तेदार ओमप्रकाश चौधरी एवं सरस्वती देवी ने बताया कि 17 जनवरी को श्री बंशीधर सरकारी अस्पताल में रीना देवी ने एक बच्चे को जन्म दिया। जन्म के बाद से ही नवजात की हालत गंभीर थी, वह न बोल पा रहा था और सांस लेने में परेशानी हो रही थी। स्थिति को देखते हुए पहले बच्चे को गढ़वा सदर अस्पताल रेफर किया गया।
परिजनों का आरोप है कि सदर अस्पताल परिसर में एक युवक उनसे मिला, जिसने झांसा देकर नहर चौक स्थित न्यू सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराने की सलाह दी। युवक ने बताया कि वहां एनआईसीयू की सुविधा मात्र दो हजार रुपये प्रतिदिन में उपलब्ध है। परिजनों के अनुसार 18 जनवरी से 3 फरवरी तक बच्चे का इलाज न्यू सिटी हॉस्पिटल में चला।
परिजनों का कहना है कि 3 फरवरी को अस्पताल प्रबंधन ने यह कहकर बच्चे को छुट्टी दे दी कि अब वह स्वस्थ है और उसे दूसरे अस्पताल ले जाया जा सकता है। इसके बाद 1 लाख 12 हजार 880 रुपये का बिल थमा दिया गया। आरोप है कि बिल में से 37 हजार 800 रुपये कम होने पर परिजनों को बच्चा ले जाने से रोक दिया गया और लगभग 24 घंटे से अधिक समय तक नवजात को अस्पताल में रखा गया।
संचालक ने आरोपों को किया खारिज
इस मामले में न्यू सिटी हॉस्पिटल के संचालक वकील अंसारी ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि बच्चे को ले जाने से नहीं रोका गया था। यदि परिजन भुगतान करने में असमर्थ थे, तो इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि जानकारी मिलने पर वे कुछ राशि कम कर देते। संचालक ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल का औपचारिक उद्घाटन अभी नहीं हुआ है, हालांकि अस्पताल को रजिस्ट्रेशन नंबर प्राप्त हो चुका है।














