सामाजिक कार्यों की परंपरा को जारी रखने हेतु युवाओं की भागीदारी अहम, सफलता के लिए निरंतर व लगातार प्रयास जरूरी
सरहदों पर सेना के जवान करते है देश की रक्षा, देश भर में सामाजिक कार्यकर्ताओं के द्वारा किए जा रहे चुनौतीपूर्ण कार्य व समर्पण भी देश के लिए है महत्वपूर्ण
नई दिल्ली / जमशेदपुर : जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्य समाज में बड़ा परिवर्तन लाते है, वही निरंतर सार्थक कार्य युवाओं को भी सामाजिक सरोकारों के अभियानों से जुड़ने को प्रेरित करते है, जिससे समाज के लिए कार्य करने की आवश्यक परंपरा आगे बढ़ती रहती है। विगत शनिवार 21 मार्च 2026 को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में चौथे सोशियोफेयर अवार्ड्स का आयोजन किया गया।

साबरी हेल्पेज के द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में देश भर से आए लगभग 10 सामाजिक नायकों व संगठनों के कार्यों को सोशियोफेयर अवार्ड्स से सम्मानित किया गया।

झारखंड के सामाजिक संस्था निश्चय फाउंडेशन के संस्थापक व झारखंड के पैडमैन के नाम से मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता तरुण कुमार को सोशियोफेयर अवार्ड्स से सम्मानित किया गया। उन्होंने मशहूर फूड हिस्टोरियन प्रीथा सेन जी से अवॉर्ड ग्रहण किया। झारखंड के गांवों में माहवारी स्वच्छता, शिक्षा, पर्यावरण, खेल, बाल अधिकार व महिला सशक्तिकरण के सम्मिलित मुद्दों पर आधारित पैडबैक, एक पैड, एक पेड़ अभियान, मिक्स जेंडर क्रिकेट, पीरियड पुस्तकालय, पीरियड एंड साइंस व जन भागीदारी से जारी कई निश्चय अभियानों की चर्चा वीडियो फिल्म के माध्यम से की गई। अत्यंत वीभत्स सामाजिक कुरीति डायन प्रथा के खिलाफ काम करने वाली, कुप्रथा की शिकार महिलाओं की मदद करनेवाली झारखंड की पद्मश्री छूटनी महतो जी को भी 2024 में सोशियोफेयर अवार्ड्स से सम्मानित किया गया था।

आपदा के समय हजारों टूरिस्ट की देखभाल करने वाले मनाली के समीप गांव के चाचा-चाची ढाबा, एचआईवी के साथ जीवन जी रहे सैकड़ों बच्चों को गोद लेने वाले कर्नाटक के महेश जाधव, सुदूर गांवों में निःशुल्क चिकित्सा मुहैया करवाने हेतु सक्रिय गांव के डॉक्टर डॉ रमन किशोर, एसिड अटैक सर्वाइवर्स को नया जीवन व हौसला दे रहे आलोक दीक्षित व अन्य सामाजिक नायकों को सोशियोफेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया। जिनकी उम्र 21 वर्ष से लेकर लगभग 70 वर्ष तक रही।

कार्यक्रम के दौरान यह बात उभर कर सामने आई कि सभी सम्मानित सामाजिक नायक, जिन्होंने अपने कार्यों से समाज पर अमिट छाप छोड़ी है, वह अपने प्रारंभिक जीवन के 18वें-20वें साल में ही समाज सेवा के कार्यों से जुड़ गए थे, और निरंतर अपने कार्यों में लगे रहे। यह वर्तमान समय की उस लोकप्रिय धारणा को कड़ी चुनौती देता है कि सार्थक सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में तभी कदम रखना चाहिए, जब आप आर्थिक रूप से सक्षम हो जाए!

सोशियो फेयर अवार्ड्स की संस्थापक आरती बीआर सिंह ने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में युवाओं का आगे आना बेहद अहम है, आप जो भी काम करें, उसमें निरंतर लगे रहे, आप एक दिन जरूर बदलाव की कहानी लिखेंगे। भारतीय वायुसेना की पूर्व स्क्वाड्रन लीडर वर्लिन ने कहा कि सरहदों पर देश की रक्षा सेना के जवान करते है, लेकिन देश की रक्षा करने के लिए हर कोई सरहद पर ही जाए, यह जरूरी नहीं। निरंतर चुनौतियां झेलते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में समाज के लिए कार्य करने वाले इन नायकों के कार्य और समर्पण भी कुछ वैसा ही है। मौके पर फिल्म निर्माता, सेना के रिटायर्ड अधिकारी, वरीय पत्रकार, वरीय सामाजिक विभूति व अन्य मुख्य रूप से उपस्थित थे।

अवॉर्ड से सम्मानित तरुण कुमार ने बताया कि तमाम सामाजिक, आर्थिक व मानसिक बाधाओं को निरंतर झेलते हुए सुदूर गांवों में निवास करनेवाले बच्चों के बेहतरी के लिए कार्यों को लगातार जारी रखना बेहद दुरूह और जटिल है। लेकिन कार्यों से जब युवा साथी प्रेरणा लेते है, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अभियान की चर्चा हौसला देती है कि कुछ भी हो, हमें रुकना नहीं है।

तरुण के निश्चय अभियान को करीब से जानने वाले युवा साथियों ने भी अपनी मौजूदगी से कार्यक्रम की रौनक बढ़ाई। मौके पर आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई कर रहे सरायकेला के लखन महली, जमशेदपुर के सॉफ्टवेयर इंजीनियर नीरज नयन, बनारस के साइकिलिस्ट प्रदीप यादव, सोनभद्र की पर्वतारोही व साइकिलिस्ट प्रिया कुमारी, जेएनयू के फ्रेंच स्कॉलर प्रकाश कुमार, बरेली के पैडमैन चित्रांश सक्सेना, समस्तीपुर के राजा कुमार, राजस्थान की हिमांशु सोना राठौर व अन्य ने कार्यक्रम में उपस्थित रहकर तरुण का हौसला बढ़ाया।











